
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं की रैंकिंग में अमेरिका ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस लिस्ट में कुल 145 देशों की सेनाओं का मूल्यांकन किया गया है। सेना की ताकत सिर्फ सैनिकों की संख्या पर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, वायु और नौसेना क्षमता समेत कई अन्य मानकों पर आधारित है।
शीर्ष 10 सेनाएं:
- अमेरिका – 0.07 अंक, 1,328,000 सक्रिय सैनिक
- रूस – 0.08 अंक, 1,320,000 सक्रिय सैनिक
- चीन – 0.08 अंक, 2,035,000 सक्रिय सैनिक
- भारत – 0.12 अंक, 1,455,550 सक्रिय सैनिक
- दक्षिण कोरिया – 0.17 अंक, 600,000 सक्रिय सैनिक
- यूके – 0.18 अंक, 247,150 सक्रिय सैनिक
- जापान – 0.18 अंक, 247,150 सक्रिय सैनिक
- फ्रांस – 0.19 अंक, 200,000 सक्रिय सैनिक
- तुर्की – 0.19 अंक, 355,200 सक्रिय सैनिक
- इटली – 0.22 अंक, 165,500 सक्रिय सैनिक
भारत, तुर्की और पाकिस्तान की स्थिति:
इस रैंकिंग में भारत चौथे स्थान पर है, जबकि तुर्की नौवें और पाकिस्तान 12वें नंबर पर है। पाकिस्तान के पास 654,000 सक्रिय सैनिक हैं, जबकि तुर्की के पास 355,200 सैनिक हैं।
विशेष बातें:
- जापान, यूके और फ्रांस जैसी सेनाएं अपनी सीमित सक्रिय सैनिक संख्या के बावजूद उच्च रैंक पर हैं, क्योंकि इनके पास अत्याधुनिक हथियार, मजबूत वायु सेना, नौसेना और मिसाइल डिफेंस सिस्टम हैं।
- UK और जापान जैसी सेनाओं को NATO एलायंस का सहयोग भी मिलता है।
- फ्रांस की ताकत उसके परमाणु हथियारों और ब्लू-वॉटर नेवी में है, जो उसे वैश्विक ऑपरेशंस में सक्षम बनाती है।
टॉप-50 में अन्य देश:
लिस्ट में यूक्रेन, सऊदी अरब, कनाडा जैसे देश भी शामिल हैं। 50वें नंबर पर वेनेजुएला है।
इस आंकड़े से साफ है कि सेना की ताकत केवल सैनिकों की संख्या पर निर्भर नहीं करती, बल्कि आधुनिक तकनीक, रणनीति और वैश्विक सहयोग इसे प्रभावित करते हैं।