
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को वोटर लिस्ट में कथित जालसाजी के मामले में जवाब दाखिल करने के लिए मोहलत दी है। मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल करने से पहले ही सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया था।
स्पेशल जज विशाल गोगने ने सोनिया गांधी की ओर से पेश वकील के अनुरोध को मंजूर किया और मामले की सुनवाई 7 फरवरी तक स्थगित कर दी। इस याचिका पर बीते साल 9 दिसंबर को सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया गया था। याचिका राउज एवेन्यू कोर्ट के ‘सेंट्रल दिल्ली कोर्ट बार एसोसिएशन’ के उपाध्यक्ष एडवोकेट विकास त्रिपाठी ने दायर की थी।
जालसाजी और धोखाधड़ी का दावा
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जनवरी 1980 में सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता के रूप में जोड़ा गया था, जबकि उस समय वह भारतीय नागरिक नहीं थीं। याचिका में जालसाजी और धोखाधड़ी का दावा किया गया है।
मजिस्ट्रेट अदालत का रुख
11 सितंबर के आदेश में मजिस्ट्रेट ने कहा था कि यह मुद्दा उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अदालत ने बताया कि इस तरह की जांच केवल केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के जिम्मे है और इसमें हस्तक्षेप करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 329 का उल्लंघन होगा।
अदालत ने शिकायतकर्ता को चेताया कि जो सीधे नहीं किया जा सकता, उसे परोक्ष रूप से भी नहीं किया जा सकता। केवल बीएनएस 2023 के तहत अपराधों को जोड़ने मात्र से अदालत के संवैधानिक प्राधिकारों में कोई भी दखल उचित नहीं ठहराया जाएगा।