Saturday, January 3

खालिस्तानी आतंकियों के काल बने शहीद रणधीर वर्मा: बैंक लूट रोकने के लिए कुर्बान किए प्राण

 

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धनबाद: कोयलांचल के वीर सपूत और अशोक चक्र से सम्मानित तत्कालीन एसपी रणधीर प्रसाद वर्मा को शनिवार को उनके 35वें शहादत दिवस पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि सभा में प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, राजनेता और हजारों नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम में शहीद की पत्नी रीता वर्मा ने पुष्प अर्पित कर अपने वीर पति को नमन किया।

 

बैंक लूट के दौरान वीरगति प्राप्त

3 जनवरी 1991 को धनबाद के हीरापुर स्थित एसबीआई शाखा में खालिस्तानी आतंकियों ने धावा बोला। सूचना मिलते ही तत्कालीन एसपी रणधीर वर्मा बिना अतिरिक्त सुरक्षा के केवल एक पिस्टल और अंगरक्षक के साथ मौके पर पहुंचे। बैंक के प्रथम तल पर आतंकियों को चुनौती देते हुए वे सीढ़ियां चढ़े, तभी आतंकियों ने उन पर एके-47 से हमला किया। गोली लगने के बावजूद रणधीर वर्मा ने गिरते हुए एक आतंकवादी को मार गिराया।

 

वे अपनी अंतिम सांस तक आतंकियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। इसी घटना में आईएसएम कर्मी श्यामल चक्रवर्ती भी शहीद हुए। एसपी के अंगरक्षक घायल हुए, जिसके बाद धनबाद सदर थाना की पुलिस के पहुंचने पर बाकी डकैत भाग गए। बाद में एक अन्य आतंकी को मार गिराया गया।

 

मरणोपरांत अशोक चक्र और सम्मान

इस साहसिक कार्य के लिए भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति ने शहीद रणधीर वर्मा को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी हुआ। बिहार सरकार ने गोल्फ ग्राउंड का नाम रणधीर वर्मा स्टेडियम रखा, जो अब शहर का प्रमुख खेल स्थल बन चुका है। रणधीर वर्मा चौक पर उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित है, जहां हर वर्ष 3 जनवरी को श्रद्धांजलि सभा होती है।

 

शहीद रणधीर वर्मा का गौरवशाली परिवार

रणधीर वर्मा के पिता बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे। उनकी पत्नी रीता वर्मा न्यायिक सेवा अधिकारी जस्टिस राम नंदन प्रसाद की पुत्री हैं। शहादत के बाद रीता वर्मा चार बार सांसद और केंद्रीय मंत्री रहीं। उनके दो पुत्र हैं: बड़ा पुत्र आईआईटी दिल्ली से स्नातक होकर मैकेंजी (अमेरिका) में सलाहकार और छोटा पुत्र नेशनल लॉ स्कूल, बेंगलुरु से विधि स्नातक होकर सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं।

 

श्यामल चक्रवर्ती को अभी भी न्याय की राह

शहीद रणधीर के साथ शहीद हुए आईएसएम कर्मी श्यामल चक्रवर्ती को अभी तक नागरिक सम्मान नहीं मिला। वामपंथी नेता एके राय की अगुवाई में यह मांग जारी है। आईएसएम गेट पर उनकी प्रतिमा के समक्ष हर वर्ष श्रद्धांजलि दी जाती है। बलिदान दिवस पर इस बार भी न्याय की आवाज बुलंद होगी।

 

 

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