
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय प्रोजेक्ट पार्ट-3 को जमीन पर उतारने के लिए उनके 5 प्रमुख अफसर रात-दिन अलर्ट मोड में हैं। इनमें रिटायर आईएएस दीपक कुमार, सचिव अनुपम कुमार, कुमार रवि, चंद्रशेखर सिंह और ओएसडी डॉ. गोपाल सिंह शामिल हैं। ये अधिकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग और दैनिक रिपोर्टिंग कर राज्य में 7 निश्चय पार्ट-3 को सफल बनाने में जुटे हैं।
7 निश्चय पार्ट-3 में क्या है?
इस ड्रीम प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य चुनावी वादों को पूरा करना है। इसके तहत:
रोजगार और नौकरियों में दोहरी वृद्धि।
उद्योग और व्यापार का तेज विकास।
कृषि क्षेत्र में किसानों की आय को दोगुना करना।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का बेहतर मॉडल।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना और नागरिक सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत कोर की अध्यक्षता में तीन उच्चस्तरीय समितियां बनाई गई हैं। इन समितियों के जरिए:
- बिहार को पूर्वी भारत का नया टेक्नोलॉजी हब बनाया जाएगा।
- किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाने के उपाय लागू किए जाएंगे।
- स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन के लिए प्रखंड और जिला स्तर पर विशिष्ट चिकित्सा केंद्र विकसित किए जाएंगे।
जमीनी क्रियान्वयन
जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) जिले स्तर पर योजनाओं की निगरानी करेंगे। छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान वे स्वयं करेंगे, जबकि बड़ी समस्याओं में रिटायर आईएएस दीपक कुमार और चार पीए तथा एक ओएसडी सक्रिय रहेंगे।
उद्योग और तकनीकी हब
जिलाधिकारी छोटे और बड़े उद्योगों के लिए प्रोत्साहन योजनाएं लागू करेंगे। नशा मुक्ति और बाल विवाह रोकने के लिए सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर कार्यक्रम चलाए जाएंगे। तकनीकी हब के तहत फिल्म सिटी, स्पोर्ट्स सिटी और एजुकेशन सिटी का निर्माण किया जाएगा।
सामूहिक जिम्मेदारी
7 निश्चय पार्ट-3 की सफलता राजधानी से जिले तक सामूहिक प्रयास पर निर्भर है। मुख्यमंत्री के 5 “पांडव” लगातार अलर्ट मोड में हैं और योजनाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर डीएम और अन्य पदाधिकारी ही इस मिशन की सफलता की कुंजी हैं।