Friday, January 2

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की फजीहत, विदेश मंत्री जयशंकर ने जमकर हड़काया

 

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की लगातार की जा रही शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए उसे फजीहत में डाल दिया। जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि भारत को अपने अधिकारों का प्रयोग तय करने का पूरा हक है और कोई भी देश इसमें दखल नहीं दे सकता।

 

आईआईटी मद्रास में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विदेश नीति पर सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, “हमें विभिन्न तरह के पड़ोसी मिले हैं। दुर्भाग्य से हमें दुष्ट पड़ोसी भी मिले हैं। अगर कोई देश जानबूझकर आतंकवाद में जुटा रहेगा, तो हमें अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा हक है और हम इसका इस्तेमाल करेंगे।”

 

विदेश मंत्री ने पाकिस्तान पर साफ शब्दों में कहा कि दशकों तक आतंकवाद को जारी रखने वाले देश से सद्भावना की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, “आप यह नहीं कह सकते कि मेरे साथ पानी साझा कीजिए और हम आतंकवाद जारी रखेंगे।”

 

जयशंकर ने भारत की पड़ोसी नीति (Neighbourhood Policy) की भी व्याख्या की और बताया कि भारत अच्छे पड़ोसियों के साथ निवेश, मदद और साझा सहयोग करता है। चाहे कोविड के समय वैक्सीन की मदद हो, यूक्रेन संकट में ईंधन और भोजन सहायता, या श्रीलंका को वित्तीय संकट के दौरान 4 बिलियन डॉलर की सहायता — भारत ने हमेशा जिम्मेदारी निभाई।

 

विदेश मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी थी। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि “पानी और खून एकसाथ नहीं बह सकते”। इसके बाद पाकिस्तान में हड़बड़ी और फजीहत शुरू हो गई, लेकिन भारत ने अपने अधिकारों और सुरक्षा हितों को सर्वोपरि रखा।

 

जयशंकर के तेवर स्पष्ट संदेश हैं कि भारत पड़ोसी देशों के साथ सहयोग को प्राथमिकता देता है, लेकिन आतंकवाद और सुरक्षा के मामले में किसी समझौते की कोई छूट नहीं देगा।

 

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