
नई दिल्ली: क्रिकेट इतिहास में कुछ मुकाबले सिर्फ खेल की वजह से नहीं, बल्कि हिंसक घटनाओं के कारण भी याद रह जाते हैं। ऐसा ही एक दिन था 1 जनवरी 1967, जब कोलकाता के ईडन गार्डंस स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच टेस्ट मैच का दूसरा दिन यादगार बन गया – लेकिन दुर्भाग्यवश दंगे और आग के लिए।
दंगे की वजह दर्शकों की भीड़ और टिकटों की अधिक बिक्री
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टेस्ट मैच देखने के लिए क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त क्रेज था। आयोजकों ने स्टेडियम की क्षमता से कई गुना ज्यादा टिकट बेच दिए। स्टैंड्स भर जाने पर दर्शक बाउंड्री के चारों ओर घास पर बैठ गए। उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे भीड़ भड़क गई और हिंसा शुरू हो गई।
भीड़ ने पुलिस को भी घेर लिया
भड़की हुई भीड़ ने स्टेडियम में पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। पुलिस भाग गई, लेकिन दर्शक कुर्सियां तोड़ते और आग लगाते हुए नियंत्रण से बाहर हो गए। खिलाड़ी भी डर के मारे मैदान से भाग निकले। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बाद हालात काबू में आए, लेकिन तब तक मैच दो दिन के लिए बाधित हो गया।
बिशन सिंह बेदी का डेब्यू
इस शर्मनाक घटना के बावजूद, यह मैच बिशन सिंह बेदी के टेस्ट करियर के डेब्यू के लिए भी याद किया जाता है। बेदी ने अपनी पहली पारी में 36 ओवर में 92 रन देकर 2 विकेट लिए।
दो दिन बाद शुरू हुआ मैच, फिर भी भारत को हार का सामना
3 जनवरी को मैच फिर से शुरू हुआ। पहले दिन वेस्टइंडीज ने 4 विकेट पर 212 रन बनाए थे। मैच शुरू होने के बाद रोहन कन्हाई 90 रन पर आउट हुए, लेकिन गैरी सोबर्स ने 85 गेंद में 70 रन और सैमूर नर्स ने 56 रन की पारी खेली। वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 390 रन बनाए।
जवाब में भारतीय टीम एक समय 2 विकेट पर 98 रन बनाने के बाद महज 167 रन पर ऑलआउट हो गई। दूसरी पारी में 3 विकेट पर 105 रन तक पहुंचने के बाद सोबर्स और लांस गिब्स की गेंदबाजी के सामने टीम 178 रन पर ऑलआउट हुई और भारत को पारी और 45 रन से हार का सामना करना पड़ा।