Tuesday, July 21

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कम बारिश में खरीफ फसलों को बचाने कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी जरूरी सलाह

कीट-रोग नियंत्रण, सिंचाई और नमी संरक्षण के बताए आसान उपाय

शिवपुरी। (सद्वार्ता)
अतुल जैन की रिपोर्ट

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इस वर्ष एल नीनो के प्रभाव के चलते जिले में अब तक सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। 21 जुलाई तक शिवपुरी जिले में मात्र 182.32 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो औसत वर्षा का करीब 22.34 प्रतिशत है। कम बारिश के कारण खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र शिवपुरी के वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक तकनीकी सलाह दी है।

कृषि विज्ञान केंद्र शिवपुरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. पुनीत कुमार तथा वरिष्ठ वैज्ञानिक (सस्य) डॉ. एम.के. भार्गव ने किसानों से मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की अपील की है।

कम बारिश में करें सिंचाई प्रबंधन

वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन खेतों में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, वहां कम बारिश के कारण फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। किसान आवश्यकता अनुसार रेनगन या स्प्रिंकलर से सिंचाई करें। वहीं टमाटर और मिर्च जैसी फसलों में ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाने से कम पानी में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है।

खाली खेतों में जुलाई अंत तक कर सकते हैं बुवाई

जिन किसानों के खेत अभी भी खाली हैं, वे जुलाई माह के अंत तक उड़द, मूंग, तिल और बाजरा जैसी फसलों की बुवाई कर सकते हैं।

खरपतवार नियंत्रण और नमी संरक्षण जरूरी

कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी कि सोयाबीन, मूंगफली, उड़द, मूंग और मक्का की फसलों में समय पर निराई-गुड़ाई करें। खेतों में फसल अवशेषों को बिछाने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खरपतवार नाशक दवाओं का छिड़काव खेत में पर्याप्त नमी होने पर ही करें। साथ ही खरपतवार नाशक और कीटनाशक दवाओं का प्रयोग एक साथ न करते हुए अलग-अलग समय पर करने की सलाह दी गई है।

सोयाबीन में चक्रभ्रंग कीट से बचाव जरूरी

सोयाबीन फसल में चक्रभ्रंग (गर्डल बीटल) कीट शाखाओं पर घेरा बनाकर नुकसान पहुंचाता है। इसके नियंत्रण के लिए थायोक्लोप्रिड 21.7 प्रतिशत एससी दवा 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

दलहनी फसलों को पीला मोजेक रोग से बचाएं

उड़द, मूंग, मूंगफली और सोयाबीन में पीतशिरा (पीला मोजेक) रोग की संभावना रहती है। इसकी रोकथाम के लिए डाईमिथोएट 30 ईसी दवा 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

मक्का में फॉल आर्मीवर्म कीट पर रखें नजर

मक्का फसल में फॉल आर्मीवर्म कीट तेजी से पत्तियों को नुकसान पहुंचाता है। इसके नियंत्रण के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी या क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि फसलों में किसी भी प्रकार की समस्या आने पर वे अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से संपर्क कर उचित मार्गदर्शन प्राप्त करें।

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