

नई दिल्ली/भोपाल। (सद्वार्ता) कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया। करीब तीन घंटे की हिरासत के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित सभी विपक्षी नेताओं को रिहा कर दिया गया, लेकिन इस कार्रवाई ने कांग्रेस और विपक्ष को सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का अवसर दे दिया।

राहुल गांधी की हिरासत के विरोध में कांग्रेस ने देशभर में प्रदर्शन किए। कई राज्यों में पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि छात्रों की मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतंत्र का मूल अधिकार है और इस पर पुलिस कार्रवाई अस्वीकार्य है।
मध्यप्रदेश विधानसभा में भी दिखा असर
राहुल गांधी की हिरासत का मुद्दा मध्यप्रदेश विधानसभा में भी जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस विधायकों ने सदन के भीतर और बाहर विरोध दर्ज कराया तथा शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की मांगों पर चर्चा की मांग करते हुए सरकार को घेरा।
इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विपक्षी नेताओं से मिलने पहुंचे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उन्हें घेरते हुए कहा कि छात्रों के मुद्दे और राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर सदन में विस्तृत चर्चा कराई जाए। सिंघार ने यह भी मांग की कि छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
हालांकि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माफी मांगने से साफ इनकार करते हुए कहा, “जब सरकार ने कोई गलती नहीं की है तो माफी किस बात की?” उन्होंने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि सरकार कानून के अनुसार कार्य कर रही है।
जंतर-मंतर से संसद तक गूंजा विरोध
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कांग्रेस और विपक्षी दलों का प्रदर्शन देर तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी की हिरासत को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि छात्रों के मुद्दे, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और राहुल गांधी की हिरासत का मामला संसद के भीतर और बाहर पूरी ताकत से उठाया जाएगा।
कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के मुद्दे पर चर्चा से बच रही है और लगातार दमनकारी रवैया अपना रही है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यदि संसद में विपक्ष की आवाज दबाई जाएगी तो विपक्ष जनता के बीच अपनी बात रखेगा। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी छात्रों की मांगें स्वीकार करने और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की।
राहुल गांधी की हिरासत ने केवल छात्रों के आंदोलन को ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी नया मुद्दा दे दिया है। संसद से लेकर सड़कों तक यह विवाद अब केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है।


