Wednesday, June 3

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57 की उम्र में ‘अनारकली’ बनी मां—पन्ना टाइगर रिजर्व में पहली बार हथिनी ने दिए जुड़वां शावक, वन्यजीव विशेषज्ञ भी हैरान

पन्ना, 24 नवंबर। पन्ना टाइगर रिजर्व में एक ऐतिहासिक और दुर्लभ घटना दर्ज की गई है। 57 वर्षीय हथिनी अनारकली ने पहली बार दो मादा जुड़वां शावकों को जन्म दिया है। रिजर्व के इतिहास में यह ऐसा पहला मौका है, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और वन कर्मियों में उत्साह की लहर पैदा कर दी है। इस जन्म के बाद रिजर्व में हाथियों की कुल संख्या बढ़कर 21 हो गई है।

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अनारकली ने शनिवार को लगभग तीन घंटे के अंतराल पर दोनों शावकों को जन्म दिया। वन्यजीव पशु चिकित्सक डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने इसे “प्रकृति का चमत्कार” और अत्यंत दुर्लभ घटना बताया। उन्होंने कहा कि हाथियों में जुड़वां बच्चों का जन्म, वह भी संरक्षित वातावरण में, बहुत कम देखा जाता है।

विशेष देखभाल और पौष्टिक आहार

रिजर्व प्रशासन ने अनारकली और नवजात शावकों के लिए विशेष प्रबंधन किया है।
उसे दिया जा रहा है—

  • दलिया
  • गन्ना
  • गुड़
  • शुद्ध घी के लड्डू
    एक समर्पित टीम दोनों शावकों के पोषण और स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है।

1986 से संरक्षण प्रयासों का हिस्सा

अनारकली को वर्ष 1986 में पन्ना टाइगर रिजर्व में लाया गया था। तब से वह

  • गश्त
  • शिकार-रोधी निगरानी
  • बचाव अभियानों
    की अहम सदस्य रही है। वन अधिकारियों के अनुसार, अब तक वह छह शावकों को जन्म दे चुकी है, लेकिन जुड़वां जन्म पहली बार हुआ है।

वन कर्मियों का कहना है कि अनारकली अपनी तेज संवेदनशीलता के लिए जानी जाती है। शिकारियों या अवैध लकड़हारों की आहट लगते ही वह तुरंत सक्रिय हो जाती है और कभी-कभी उन्हें डराने के लिए सूंड से पत्थर भी फेंकती है।

बारिश के मौसम में गश्त की रीढ़

मानसून में जब जंगल के रास्ते वाहनों के लिए बंद हो जाते हैं, तो अनारकली जैसी हथिनियां

  • बाघों की ट्रैकिंग
  • कठिन इलाकों की निगरानी
  • बचाव अभियानों
    की रीढ़ बन जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जुड़वां शावकों का जन्म हाथी गश्ती दल की क्षमता को और मजबूत करेगा, जो बाघ संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत का 22वां बाघ अभयारण्य

पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) देश का 22वां और मध्य प्रदेश का पांचवां बाघ अभयारण्य है। यह विंध्य पर्वत श्रृंखला में स्थित पन्ना और छतरपुर जिलों के विशाल वन क्षेत्रों में फैला है। PTR न सिर्फ बाघों के पुनर्वास के लिए, बल्कि

  • मगरमच्छ संरक्षण
  • गिद्ध पुनर्वास कार्यक्रम
    के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है।

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