
मॉस्को: ब्राजील के बाद 1 जनवरी 2026 से भारत ने औपचारिक रूप से ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता संभाल ली है। भारत की इस अध्यक्षता को लेकर रूस ने सक्रिय और पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया है।
रूस के डिप्टी विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने भारत की अध्यक्षता की सराहना करते हुए कहा, “दुनिया में बहुत कम देश भारत की बराबरी कर सकते हैं। भारत ने संस्कृति, दर्शन और नवाचार के क्षेत्र में मानवता के लिए बहुत कुछ दिया है। हम उम्मीद करते हैं कि भारत की अगुवाई में ब्रिक्स संगठन नई सफलता की सीढ़ियां चढ़ेगा।”
रयाबकोव ने यह बयान दिल्ली में हुई ब्रिक्स देशों की पहली शेरपा और सूस-शेरपा बैठक के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली का मानवता पर केंद्रित दृष्टिकोण इस साल की भारतीय अध्यक्षता के लिए एक मजबूत लेबल है। उनका कहना था कि ब्रिक्स में सच्ची मल्टीपोलैरिटी को बढ़ावा दिया जाएगा और किसी तरह का हेजेमनी (हुकूमत चलाने) का कोई स्थान नहीं होगा।
रूसी विदेश मंत्री का समर्थन
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी बयान जारी किया और कहा कि भारत वैश्विक चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ भविष्य की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत के साथ संयुक्त राष्ट्र में सहयोग की बात कही।
ब्रिक्स का विस्तार और नए सदस्य
सर्गेई रयाबकोव ने संगठन के विस्तार पर कहा, “ब्रिक्स नए सदस्यों को जोड़ने और पार्टनर्स के साथ सहयोग बढ़ाने पर फोकस कर रहा है। ब्रिक्स का दरवाजा खुला है। जो देश इसमें शामिल होना चाहते हैं, वे जान सकते हैं। कोई इसका विरोध नहीं कर रहा।”
ब्रिक्स गुट 2006 में बना था। उस समय इसमें शामिल थे:
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ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन (BRIC)।
2011 में साउथ अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। इसके बाद:
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इजिप्ट, ईरान, यूएए और इथियोपिया फुल मेंबर्स बने।
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जनवरी 2025 में इंडोनेशिया शामिल हुआ।
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बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, वियतनाम, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर देशों का दर्जा मिला।
ब्रिक्स लगातार विस्तार और वैश्विक सहयोग के प्रयासों में लगा हुआ है।
