
नई दिल्ली: पुणे के दो भाइयों ने गरीबी से सफलता की ऊँचाइयों तक का सफर तय कर अपने माता-पिता को शानदार ऑडी कार गिफ्ट की। रोहित नंदेश्वर और उनके भाई की यह कहानी सिर्फ एक कार खरीदने की नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और परिवार के प्यार की प्रेरणादायक मिसाल है।
रोहित बताते हैं कि उनका बचपन तंगहाली में बीता। घर छोटा था, दीवारें टूटी हुई थीं और छत टपकती थी। पिता 35 साल तक ऑटो रिक्शा चलाते रहे और मां घर की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहती थीं। इसके बावजूद घर में प्यार की कमी कभी नहीं थी।
छोटे से उम्र में रोहित ने काम करना शुरू किया। उन्होंने सिम कार्ड बेचे, साइबर कैफे में काम किया और पैम्फलेट बांटे। 2015 में वह 4,500 रुपये महीने पर एचआर असिस्टेंट बन गए। इसके अलावा भाइयों ने एक छोटा इवेंट्स का बिजनेस भी चलाया। हर छोटा काम उन्हें जिम्मेदारी और अनुभव सिखाता गया।
साल 2018 में रोहित ने स्टॉक मार्केट के बारे में सीखना शुरू किया। शुरुआती सफलता के बाद कोरोना महामारी ने चुनौती पेश की और एक ही महीने में उन्हें लगभग 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ। ईएमआई और कर्ज का बोझ बढ़ गया। इस कठिन समय में परिवार ने उनका साथ दिया और पिता के शब्द उन्हें प्रेरित करते रहे: “ईमानदारी से काम कर; नसीब हर बार साथ नहीं देता।”
तीन साल की मेहनत और सीखने के बाद भाइयों ने न सिर्फ नुकसान की भरपाई की बल्कि पहले से कहीं ज्यादा तरक्की हासिल की। दिसंबर 2025 में उन्होंने अपने माता-पिता के लिए एक ऑडी कार गिफ्ट की। रोहित ने याद किया, “जब हमने मम्मी-पापा को कार की चाबी दी, वे भावुक हो गए। उस दिन लगा, जिंदगी में सब कुछ मिल गया।”
यह कहानी दिखाती है कि कैसे कठिनाइयों का सामना, लगातार मेहनत और परिवार के सहयोग से बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।