
विदिशा: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। पठारी के छपारा गांव में एक गर्भवती महिला को सरकारी एंबुलेंस न मिलने के कारण सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। कड़ाके की ठंड और अंधेरे में ग्रामीणों और गांव की चौकीदार ने मानवता की मिसाल पेश की।
घटना गुरुवार आधी रात की है। छपारा निवासी संध्या आदिवासी को रात करीब 12 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने बार-बार 108 एंबुलेंस और जननी एक्सप्रेस को कॉल किया, लेकिन सेवा देने वाले वाहन मौके पर नहीं पहुंचे। दर्द असहनीय होने पर संध्या को पैदल ही लगभग 3 किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की मजबूरी आई।
सड़क पर टॉर्च और तिरपाल के सहारे प्रसव
गांव की चौकीदार हरी बाई और स्थानीय दाई राजबाई ने प्रसव कराने की जिम्मेदारी संभाली। कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे नवजात और प्रसूता को सिगड़ी की गर्मी और तिरपाल से ढककर बचाया गया। पति ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर रोशनी दी और इसी में सड़क किनारे प्रसव कराया गया।
प्राइवेट वाहन से अस्पताल रवाना
प्रसव के बाद भी सरकारी वाहन मौके पर नहीं पहुंचे। तब स्थानीय निवासी संजय जैन अपनी निजी कार लेकर आए और रात 3:30 बजे जच्चा-बच्चा अस्पताल पहुँचाया गया। ग्रामीणों और चौकीदार की तत्परता से मां और बच्ची सुरक्षित रहे।
स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू
विदिशा सीएमएचओ रामहित कुमार ने मीडिया को बताया कि पठारी के पास कुरवाई और त्योंदा में एंबुलेंस तैनात रहती हैं। जांच की जा रही है कि वाहन क्यों समय पर नहीं पहुँचे। दोषी कर्मचारियों और एंबुलेंस संचालन टीम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल आपातकालीन सहायता की आवश्यकता पर सवाल उठाती है।