
देश की अग्रणी फ्यूल रिटेल कंपनी जियो-बीपी (Jio-bp) ने पेट्रोल सेगमेंट में एक नई पहल करते हुए इंजन-सफाई वाली ‘ACTIVE पेट्रोल टेक्नॉलजी’ लॉन्च की है। कंपनी का दावा है कि यह नई तकनीक बिना किसी अतिरिक्त खर्च के हर साल करीब 100 किलोमीटर ज्यादा माइलेज देने में मदद करेगी। इस पेट्रोल को इंडिया एनर्जी वीक 2026 के दौरान केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मौजूदगी में लॉन्च किया गया।
जियो-बीपी के मुताबिक, यह पेट्रोल खास तौर पर भारतीय वाहनों और सड़क परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिससे इंजन की कार्यक्षमता बनी रहे और वाहन लंबे समय तक बेहतर हालत में चले।
इंजन को अंदर से साफ रखेगी नई तकनीक
ACTIVE टेक्नॉलजी वाला यह पेट्रोल इंजन के अहम हिस्सों पर जमी गंदगी और हानिकारक डिपोजिट्स को साफ करता है। इससे इंजन ज्यादा स्मूथ तरीके से काम करता है और उसकी परफॉर्मेंस बेहतर होती है। कंपनी का कहना है कि नियमित इस्तेमाल से इंजन लंबे समय तक साफ और भरोसेमंद बना रहता है।
जियो-बीपी के अनुसार, यह पेट्रोल भारत में टू-व्हीलर और कार चालकों के लिए हर साल औसतन 100 किलोमीटर अतिरिक्त ड्राइविंग का लाभ दे सकता है।
व्यापक रिसर्च और कड़े परीक्षण
कंपनी ने बताया कि यह हाई-परफॉर्मेंस पेट्रोल बीपी के 100 साल से अधिक के वैश्विक फ्यूल रिसर्च अनुभव के आधार पर विकसित किया गया है। इसे इंडस्ट्री स्टैंडर्ड टेस्ट्स के साथ-साथ भारतीय इंजनों की जरूरतों के अनुसार विशेष रूप से परखा गया है।
इसकी वास्तविक परिस्थितियों में सफाई क्षमता जांचने के लिए जियो-बीपी ने कोयंबटूर टेस्ट ट्रैक पर एक मोटरसाइकल को 4,000 किलोमीटर से अधिक चलाकर परीक्षण किया। कंपनी का कहना है कि यह पेट्रोल सिर्फ माइलेज ही नहीं बढ़ाता, बल्कि इंजन के पुर्जों की घिसावट भी कम करता है, जिससे उनकी उम्र बढ़ती है और बार-बार सर्विसिंग की जरूरत घटती है।
कम मेंटेनेंस, ज्यादा एफिशिएंसी
जियो-बीपी के चेयरमैन सार्थक बेहूरिया ने कहा कि भारतीय उपभोक्ता ऐसे इंजन चाहते हैं जो स्मूथ चलें, भरोसेमंद हों, कम मेंटेनेंस मांगें और उतने ही पेट्रोल में ज्यादा दूरी तय करें। ACTIVE टेक्नॉलजी के जरिए कंपनी ऐसा पेट्रोल दे रही है, जो चलते-चलते इंजन को साफ रखता है और हानिकारक जमाव को कम करता है।
वहीं, जियो-बीपी के सीईओ अक्षय वाधवा ने बताया कि करीब पांच साल की कड़ी मेहनत के बाद विकसित की गई यह फ्यूल केमिस्ट्री न केवल फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ाती है, बल्कि वाहन के मेंटेनेंस खर्च को भी कम करने में मददगार साबित हो सकती है।