
नई दिल्ली: चांदी की कीमत इस समय असाधारण तेजी से बढ़ रही है। गुरुवार को एमसीएक्स पर चांदी पहली बार प्रति किलो 4 लाख रुपये के पार चली गई। यह उछाल चांदी को 2 लाख रुपये से 4 लाख रुपये तक पहुँचने में मात्र दो महीनों से भी कम समय में आया।
व्हाइटओक म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट “Gold is Talking, Silver is Screaming” में इस तेज़ी को लेकर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोना और चांदी अलग-अलग संकेत दे रही हैं।
सोना vs चांदी:
सोना: व्यापक आर्थिक तनाव, मुद्रा का कमजोर होना, भू-राजनीतिक जोखिम और वित्तीय अस्थिरता के समय पोर्टफोलियो के लिए बीमा का काम कर रहा है।
चांदी: औद्योगिक मांग के साथ-साथ सट्टेबाजी की बढ़ती गतिविधि का संकेत देती है। इसका पैटर्न अब पराबोलिक (Parabolic) हो गया है, जो ऐतिहासिक रूप से अस्थिरता से पहले देखा गया है।
क्या चांदी में गिरावट आ सकती है?
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि चांदी की कीमतों में तेज़ी के बाद 40-55% तक गिरावट देखने को मिल सकती है। चांदी, एक कीमती और औद्योगिक धातु होने के कारण, इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग के प्रभाव में रहती है। सट्टेबाजी की पोज़िशन हटने पर इसका तेज़ उलटफेर हो सकता है।
निवेशकों के लिए सुझाव:
व्हाइटओक का कहना है कि चांदी पूरी तरह छोड़ने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि समझदारी से पुन: व्यवस्थित करना चाहिए। इसके लिए:
तेज़ लाभ के बाद चांदी की हिस्सेदारी कम करें।
सोना मुख्य होल्डिंग के रूप में बनाए रखें।
चांदी को सामरिक एक्सपोज़र के तौर पर रखें, “बाय-एंड-होल्ड” संपत्ति के बजाय।
इस समय निवेशक सतर्क रहें और अपने पोर्टफोलियो में धातुओं का संतुलित और बीमा आधारित आवंटन बनाए रखें।