
देहरादून: उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों के प्रबंधन को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित होगा। चार धामों में से यमुनोत्री मंदिर समिति ने अभी इस विषय पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मंदिर क्षेत्रों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के मामले में साधु-संतों, तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय निवासियों सहित सभी हितधारकों के साथ सहमति बन गई है। इस सप्ताह के अंत में होने वाली बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप दिया जाएगा, जिसके बाद यह नियम बद्रीनाथ और केदारनाथ धामों में लागू हो जाएगा।
द्विवेदी ने कहा कि गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की परंपरा आदि शंकराचार्य के समय से चली आ रही है और संविधान अनुच्छेद 26 के तहत प्रत्येक संप्रदाय को अपने धार्मिक स्थलों का प्रबंधन करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सनातन धर्म में विश्वास रखने वाले सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया जाएगा।
गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने कहा कि मां गंगा के मंदिर में किसी भी गैर हिंदू का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होगा। वहीं, हाल ही में हरिद्वार में गंगा सभा ने अर्धकुंभ के पहले पूरे कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदू प्रवेश को रोकने की मांग की है और हर की पौड़ी एवं आसपास के घाटों पर ‘अहिंदू निषेध क्षेत्र’ के बोर्ड लगवा दिए हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चार धाम यात्रा का प्रबंधन मुख्य रूप से मंदिर समितियों के अधीन है और सरकार केवल सहयोगी की भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सभी हितधारकों से विचार-विमर्श किया जाएगा।
इस फैसले पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि सरकार जन समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस प्रकार के कदम उठा रही है।