
नई दिल्ली: भारतीय रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो पर पहुंच गया। यह गिरावट ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच चल रहे तनाव के कारण निवेशकों में बढ़ती घबराहट और विदेशी निवेशकों की निकासी के बीच आई है। रॉयटर्स के अनुसार, रुपया 91.2950 प्रति अमेरिकी डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले रिकॉर्ड 91.0750 को पार कर गया।
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले साल रुपये में लगभग 5% की गिरावट आई थी, जबकि इस साल अब तक यह करीब 1.5% कमजोर हो चुका है। विदेशी निवेशक शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं और आयातक रुपये के और गिरने की आशंका के चलते अपनी डॉलर जरूरतों को पहले से सुरक्षित कर रहे हैं।
रुपया गिरने के कारण
ग्रीनलैंड विवाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने वैश्विक निवेशकों को असुरक्षित कर दिया।
विदेशी पूंजी का आउटफ्लो: जनवरी में विदेशी निवेशकों ने लगभग 3 अरब डॉलर निकाले हैं, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 18.9 अरब डॉलर था।
अमेरिका-भारत ट्रेड डील में देरी: किसी ठोस प्रगति के न होने के कारण विदेशी पूंजी का प्रवाह धीमा रहा।
एएनजेड बैंक के FX रणनीतिकार धीरज निम के अनुसार, “रुपये की सबसे बड़ी चुनौती पूंजी के मोर्चे पर है। आरबीआई फिलहाल कमजोर रुपये को सहन कर सकता है, लेकिन दबाव बढ़ने पर कड़ा रुख अपना सकता है।”
विश्लेषकों का मानना है कि रुपये का प्रदर्शन केवल घरेलू बुनियादी कारणों से नहीं, बल्कि मांग और आपूर्ति के संरचनात्मक असंतुलन से प्रभावित हो रहा है। अगर ग्रीनलैंड विवाद और बढ़ता है, तो रुपये में और गिरावट देखने को मिल सकती है।