Thursday, June 18

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बीसीसीआई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में बड़ा बदलाव, विराट-रोहित की सैलरी में हो सकती है कटौती

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) खिलाड़ियों के सालाना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। चयन समिति द्वारा प्रस्तावित इस नए ढांचे के तहत अब खिलाड़ियों को उनके नाम, रुतबे या पुरानी उपलब्धियों के बजाय मौजूदा प्रदर्शन और टीम में सक्रियता के आधार पर ग्रेड दिए जाएंगे। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर टीम इंडिया के सीनियर खिलाड़ियों, विशेषकर विराट कोहली और रोहित शर्मा, पर पड़ने की संभावना है।

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तीन ग्रेड में सिमटेगा नया सिस्टम

बीसीसीआई वर्तमान में लागू चार-स्तरीय सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था (A+, A, B और C) को समाप्त कर अब केवल तीन ग्रेड—A, B और C रखने पर विचार कर रहा है। मौजूदा व्यवस्था में A+ ग्रेड के खिलाड़ियों को सालाना 7 करोड़ रुपये मिलते हैं, लेकिन नए प्रस्ताव में इस ग्रेड को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

बोर्ड अधिकारियों का मानना है कि खिलाड़ियों की श्रेणी अब उनकी विरासत के बजाय इस आधार पर तय होनी चाहिए कि वे कितने फॉर्मेट में सक्रिय हैं और टीम की भविष्य की योजनाओं में उनकी भूमिका क्या है।

विराट और रोहित के ग्रेड में कटौती संभव

नए सिस्टम के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ी, जो फिलहाल मुख्य रूप से वनडे फॉर्मेट में ही खेलते नजर आ रहे हैं, उन्हें ग्रेड B में रखा जाए। वर्तमान नियमों के अनुसार ग्रेड B के खिलाड़ियों को सालाना 3 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है।

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह ढांचा खिलाड़ियों के वर्कलोड और वर्तमान भागीदारी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट में लगातार देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता और उचित सम्मान मिले।

युवा खिलाड़ियों को मिलेगा फायदा

बीसीसीआई की शीर्ष परिषद की आगामी बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इस बदलाव के पीछे बोर्ड की मंशा खिलाड़ियों को हर फॉर्मेट में निरंतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना और भविष्य की टीम तैयार करना है।

नया सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम उभरते हुए युवा खिलाड़ियों के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है, क्योंकि अब वे केवल अपने प्रदर्शन के दम पर ऊंचे ग्रेड में जगह बना सकेंगे। यह फैसला भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि बीसीसीआई अब भविष्य, फिटनेस और निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।

 

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