Wednesday, June 24

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सियासी सन्नाटे में नीतीश की रफ्तार ने विपक्ष को हिलाया, लेकिन नई पारी में 4 बड़े सवाल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने केवल NDA की प्रचंड जीत का दावा पुख्ता नहीं किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि “टाइगर अभी जिंदा है”। नीतीश कुमार ने चुनावी रणनीति और अपने खिलाफ उठे सवालों का ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया, जो वोटों के रूप में सुनामी बनकर सामने आया।

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जब चुनाव प्रचार अपने चरम पर था, तब पूरे बिहार में 31 अक्टूबर को मौसम ने अचानक करवट ली। भारी बारिश और खराब मौसम के चलते तमाम नेताओं का प्रचार ठप हो गया। हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहे थे, और कई नेता अपने घरों में कैद हो गए थे। लेकिन नीतीश कुमार ने इन हालातों की परवाह किए बिना 500 किलोमीटर की यात्रा की और खराब मौसम में भी जनता के बीच जाकर संपर्क किया। इस दौरान उन्होंने करीब दो दर्जन विधानसभा सीटों पर दौरा किया और रोड शो तक किया। यही नहीं, मधुबनी जिले के झंझारपुर में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के घर में रुक कर नीतीश ने यह साबित किया कि वह किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।

नीतीश कुमार की यह सक्रियता न केवल उनके समर्थकों में जोश भरने का काम किया, बल्कि राज्य के सियासी हलकों में यह संदेश भी दिया कि “टाइगर अभी जिंदा है”।

हालांकि, अब नीतीश कुमार के सामने कुछ ऐसे अहम सवाल खड़े हो गए हैं, जो आगामी पारी में उनकी राह में मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। ये सवाल उनकी सत्ता, छवि और भविष्य के फैसलों से जुड़ी हुई हैं:

सवाल 1: क्या सरकार पर रख पाएंगे नियंत्रण?
नीतीश कुमार को हमेशा बिना किसी हस्तक्षेप के काम करने वाला मुख्यमंत्री माना गया है, लेकिन इस बार उन्हें सत्ता में आने के बाद कुछ नए दबावों का सामना करना पड़ेगा। बीजेपी पहले से भी मजबूत स्थिति में है, और इसका असर नीतीश की सरकार के फैसलों पर भी दिख सकता है।

सवाल 2: क्या नीतीश ने उत्तराधिकारी की तलाश की है?
नीतीश कुमार के लिए यह चुनाव राज्य में अंतिम चुनाव माना जा रहा है। 74 साल की उम्र और डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक सत्ता में रहने के बाद यह सवाल उठता है कि उन्होंने पार्टी के भीतर किसी नए नेता को तैयार किया है या नहीं। अगले पीढ़ी का नेतृत्व तय करने की जिम्मेदारी अब उनकी होगी।

सवाल 3: क्या सुशासन की छवि बनाए रखेंगे?
नीतीश कुमार को सुशासन बाबू के रूप में जाना जाता है, लेकिन अब उन्हें अपनी छवि को बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। चुनाव से पहले की लोकलुभावन घोषणाओं से इनकंबेंसी का असर कम हुआ, लेकिन अब उन्हें फिर से “गुड गवर्नेंस” और विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

सवाल 4: शराबबंदी पर क्या नया फैसला होगा?
नीतीश कुमार ने 2015 में बिहार में शराबबंदी लागू की थी, जिसे शुरुआत में महिलाओं ने सराहा था। हालांकि, अब राज्य में अवैध शराब का कारोबार बढ़ चुका है और इससे राज्य की आर्थिक स्थिति पर दबाव भी पड़ा है। ऐसे में, क्या नीतीश इस नीति में कोई बदलाव करेंगे, यह एक बड़ा सवाल बनकर उभरा है।

अब जबकि नीतीश कुमार फिर से सत्ता में हैं, उनके सामने ये चार सवाल राजनीतिक निर्णयों और उनके भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण साबित होंगे। ये सवाल न केवल उनके नेतृत्व की दिशा तय करेंगे, बल्कि बिहार की राजनीति में अगले कुछ सालों के लिए नए समीकरण भी बना सकते हैं।

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