
योग एक्सपर्ट और गर्भ संस्कार कोच डॉ. नूतन पाखरे के अनुसार, गर्भ संस्कार कोई धार्मिक रीति–रिवाज नहीं है, बल्कि यह प्रेग्नेंसी के दौरान मां और शिशु की देखभाल का एक वैज्ञानिक तरीका है। इसका उद्देश्य गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए सकारात्मक और सुरक्षित वातावरण तैयार करना और होने वाली मां को मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से संतुलित रखना है।
गर्भ संस्कार के फायदे:
- शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है।
- होने वाली मां में भावनात्मक और मानसिक संतुलन आता है।
- प्रेग्नेंसी में शिशु की सुनने की क्षमता 18-20 हफ्तों के आसपास विकसित होती है। इस दौरान हल्की और सुखद आवाजें शिशु को आराम देती हैं।
कैसे अपनाएं गर्भ संस्कार:
- प्रेग्नेंट महिला संतुलित और पौष्टिक आहार लें:
- आयरन: पालक, गुड़, खजूर, दालें
- कैल्शियम: रागी, तिल, दही
- ओमेगा-3: अखरोट, अलसी के बीज
- प्रोटीन: दाल, पनीर, दही, भीगे मेवे
- फोलेट: हरी पत्तेदार सब्जियां, खट्टे फल
- बिना डॉक्टर की सलाह के हर्बल सप्लीमेंट्स या फास्टिंग न करें।
- शिशु को संगीत सुनाएं: सॉफ्ट क्लासिकल म्यूजिक, हल्की आवाज़ में बात करें, तेज आवाज़ से बचें।
- आराम और नींद पर ध्यान दें:
- रोजाना 7-9 घंटे की नींद लें
- 20 हफ्ते के बाद बाईं करवट सोएं
- थकान लगे तो दिन में थोड़ी देर आराम करें
डॉ. नूतन बताती हैं कि गर्भ संस्कार मेडिकल सलाह और रूटीन के साथ अपनाया जाना चाहिए, जिससे प्रेग्नेंसी और शिशु के स्वास्थ्य पर दोनों का सकारात्मक असर हो।