
नई दिल्ली: अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसमें भारत, चीन और ब्राजील शामिल हैं। हालांकि चीन को पहले की तरह छूट मिलने की संभावना है। इस कदम से भारतीय शेयर बाजार में भी तेज गिरावट देखी गई।
चीन पर नरमी क्यों?
अमेरिका लंबे समय से चीन के प्रति नरम रवैया अपनाता रहा है। इसका मुख्य कारण चीन का दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (rare earth minerals) पर दबदबा है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। चीन ने अमेरिका को दुर्लभ पृथ्वी खनिजों और चुम्बकों के निर्यात पर लाइसेंस प्रतिबंध तक लगा दिए थे। इसके कारण अमेरिकी उद्योगों, खासकर ऑटो और तकनीकी क्षेत्र में संकट पैदा हो सकता था। यही वजह है कि अमेरिका चीन के खिलाफ सख्त टैरिफ नीति अपनाने में सतर्क है।
भारत पर सख्ती क्यों?
चीन के विपरीत अमेरिका भारत पर कड़ा रुख रखता है। भारत रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीद रहा है, और अमेरिका मानता है कि यह यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की अर्थव्यवस्था को मदद कर रहा है। भारत के पास चीन जैसी रणनीतिक और आर्थिक ताकत नहीं है, जिससे अमेरिका के लिए दबाव बनाना आसान है। इसलिए भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाए गए हैं और जरूरत पड़ने पर यह 500 फीसदी तक बढ़ सकता है।
विश्लेषकों का कहना है:
अमेरिका की नीति स्पष्ट रूप से यह दिखाती है कि वैश्विक राजनीति और रणनीतिक जरूरतें टैरिफ निर्णयों को प्रभावित करती हैं। चीन के पास अमेरिका के लिए जरूरी संसाधन हैं, जबकि भारत पर आर्थिक दबाव डालना अमेरिका के लिए कम जोखिम भरा विकल्प है।
