Saturday, January 10

भारत में बनेगा C-130J सुपर हरक्यूलिस मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान, लॉकहीड मार्टिन का ग्लोबल प्लान

नई दिल्ली: भारत अब न केवल अपनी जरूरत के लिए, बल्कि अन्य देशों के लिए भी C-130J सुपर हरक्यूलिस सैन्य परिवहन विमानों का निर्माण कर सकता है। यह कदम भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन भारत में C-130J विमानों की आखिरी असेंबली लाइन लगाने पर विचार कर रही है। यह पहली बार होगा जब यह विमान अमेरिका के बाहर बनेगा। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह सुविधा भविष्य में इस विमान के लिए एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब भी बन सकती है।

लॉकहीड मार्टिन के वाइस प्रेसिडेंट, स्ट्रेटेजी डेवलपमेंट, एयर मोबिलिटी एंड मैरीटाइम मिशन्स, रॉब टोथ ने कहा, हम भारत में C-130J विमानों के लिए दूसरी फाइनल असेंबली लाइन स्थापित करेंगे। यह मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) प्रोग्राम के तहत भारतीय वायु सेना के लिए होगी। इसके साथ ही जॉर्जिया के मैरिएटा में अन्य ग्राहकों के लिए उत्पादन जारी रहेगा।

रॉब टोथ ने आगे बताया कि इससे भारत के एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी। यह ग्लोबल सप्लाई चेन को भी मजबूत करेगा और किसी भी क्षेत्रीय या वैश्विक सुरक्षा संकट के समय उत्पादन बढ़ाने की क्षमता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत, MTA प्रोग्राम के अंतर्गत भारत के भविष्य के C-130J विमानमेड इन इंडिया, फॉर इंडिया और संभवतः फॉर वर्ल्डहोंगे।

भारतीय वायु सेना की जरूरत और योजना

भारतीय वायु सेना ने दिसंबर 2022 में लगभग 80 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदने के लिए RFI (रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन) जारी किया था। ये विमान वायु सेना के पुराने सोवियत-युग के AN-32 और IL-76 विमानों की जगह लेंगे। इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए लॉकहीड मार्टिन का मुकाबला एयरबस के A400M और एम्ब्रेयर के C-390 से होने की संभावना है।

फिलहाल भारतीय वायु सेना के पास लगभग एक दर्जन C-130J विमान हैं। इनमें से 6 विमान 2011 में और बाकी 2017 में सप्लाई किए गए थे। यह विमान भारी सामान और सैनिकों को कम तैयारी वाली जगहों पर उतारने में सक्षम है। भारत में इसका उत्पादन शुरू होने से न केवल भारतीय वायु सेना को फायदा होगा, बल्कि यह देश को रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा निर्यातक भी बनाएगा। साथ ही, यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और मजबूत करेगा और देश की रक्षा उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी करेगा।

 

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