Saturday, January 10

सिर्फ इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले रहे घाटे में, मल्टी एसेट फंड ने दिया 22% से ज्यादा का रिटर्न

मुंबई: बीते साल सोना और चांदी के रिटर्न ने निवेशकों की आँखें खोल दी हैं। 2025 में सोने ने 74% से ज्यादा का रिटर्न दिया, वहीं चांदी का रिटर्न तो दोगुना यानी 160% तक पहुंच गया। इसके विपरीत, सिर्फ इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशक पिछड़ गए। इस परिदृश्य में अब मल्टी एसेट एलोकेशन फंड की मांग बढ़ रही है।

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मल्टी एसेट फंड क्यों हैं फायदेमंद?
मल्टी एसेट फंड एक ही समय में सोना, चांदी, इक्विटी और डेट जैसी विभिन्न परिसंपत्तियों में निवेश करते हैं। इससे निवेशकों को डायवर्सिफिकेशन, जोखिम कम करना और अस्थिरता में संतुलन जैसी सुविधाएं मिलती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फंड मंदी के समय पूंजी सुरक्षित रखने और अलग-अलग निवेशों को मैनेज करने की झंझट से बचाता है।

मल्टी एसेट फंड का प्रदर्शन:

  • निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड: पिछले तीन वर्षों में 22.71% और 2025 में 22.30% का रिटर्न
  • यूटीआई मल्टी एसेट एलोकेशन फंड: तीन साल में 12.75%, 2025 में 22.35%
  • एचडीएफसी मल्टी एसेट एलोकेशन फंड: तीन साल में 15.20%, 2025 में 16.54%

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फंड निवेशकों को अधिक सुरक्षित और संतुलित रिटर्न देने में सक्षम हैं। वे केवल सोना और चांदी में निवेश का अवसर ही नहीं देते, बल्कि उच्च जोखिम वाले एसेट्स और सुरक्षित एसेट्स के बीच संतुलन भी बनाए रखते हैं।

निवेशक अब समझ चुके हैं कि सिर्फ इक्विटी पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। मल्टी एसेट फंड के माध्यम से विविध परिसंपत्तियों में निवेश कर बेहतर और स्थिर रिटर्न हासिल किया जा सकता है।

 

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