Saturday, January 10

अटलांटिक में अमेरिकी कार्रवाई: रूसी तेल टैंकर जब्त, पुतिन की ताकत पर उठे सवालजहाज पर सवार 3 भारतीय भी हिरासत में

 

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अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को जब्त कर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की वैश्विक शक्ति-छवि को बड़ा झटका दिया है। यह कार्रवाई अमेरिका के तट से करीब 4000 किलोमीटर दूर की गई, जबकि उसी क्षेत्र में रूसी परमाणु पनडुब्बी की मौजूदगी की खबरें भी सामने आई थीं।

 

अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने बुधवार, 7 जनवरी की सुबह रूसी तेल टैंकर ‘मैरीनेरा’ को अपने नियंत्रण में ले लिया। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज वेनेजुएला से प्रतिबंधित तेल लेकर जा रहा था, जिसकी जब्ती के लिए अमेरिकी अदालत से पहले ही आदेश जारी किया जा चुका था।

 

पुतिन की छवि पर असर

 

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सत्ता संभाले 25 वर्ष हो चुके हैं और इस दौरान उन्होंने खुद को एक सख्त और निर्णायक नेता के रूप में स्थापित किया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में रूसी जहाज पर अमेरिकी कब्जे की घटना ने उनकी इस छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस इस कार्रवाई का जवाब नहीं देता, तो इसे उसकी कमजोरी के रूप में देखा जाएगा। यूरेशियन टाइम्स में प्रकाशित एक विश्लेषण में कहा गया है कि यह घटना दर्शाती है कि अमेरिका के साथ सीधे टकराव की स्थिति में रूस के विकल्प बेहद सीमित हैं।

 

रूस में जवाबी कार्रवाई की मांग

 

अमेरिकी कदम के बाद रूस के भीतर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। रूसी संसद (ड्यूमा) की रक्षा समिति के उपाध्यक्ष एलेक्सी जुरावलेव ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध में पहले से उलझा रूस अमेरिका या नाटो के साथ नया मोर्चा खोलने की स्थिति में नहीं है।

 

रूस समर्थक सैन्य ब्लॉगर्स भी मानते हैं कि परमाणु हथियारों को छोड़ दें तो पारंपरिक सैन्य ताकत में अमेरिका और नाटो के सामने रूस की स्थिति कमजोर है।

 

जहाज पर सवार 3 भारतीय भी हिरासत में

 

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, टैंकर पर कुल 28 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें तीन भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। सभी को हिरासत में ले लिया गया है। भारतीय नागरिकों की स्थिति को लेकर भारत सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर मामले पर नजर रखी जा रही है।

 

वैश्विक राजनीति में बढ़ता तनाव

 

यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और अमेरिका व रूस के बीच तनाव चरम पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ एक कानूनी कदम नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का स्पष्ट संदेश भी है।

 

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