
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पालतू कुत्तों के मामलों पर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अनजाने में भी यदि कोई पालतू कुत्ता किसी पड़ोसी पर हमला करता है, तो यह अपराध माना जाएगा। साथ ही अदालत ने एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) के कमजोर अमल पर नाराजगी जताई और ग्राम पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम की जिम्मेदारी पर जोर दिया।
सुनवाई में वरिष्ठ वकीलों सी. यू. सिंह, कृष्णन वेणुगोपाल, ध्रुव मेहता और अन्य ने दलीलें पेश कीं। एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट गौरव अग्रवाल ने बताया कि चार राज्यों ने हाल ही में इस मामले में अपने अनुपालन हलफनामा दाखिल किए हैं। दिल्ली जैसे शहरों में चूहों और बंदरों की बढ़ती समस्या के बीच कुत्तों को हटाने के नकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे।
कोर्ट ने आईआईटी दिल्ली मॉडल का हवाला दिया, जहां युद्धस्तर पर कुत्तों का स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन किया गया, जिससे पिछले तीन वर्षों में रेबीज का कोई मामला सामने नहीं आया। माइक्रो-चिपिंग और जियो टैगिंग के माध्यम से कुत्तों की निगरानी भी आसान हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगमों को चेतावनी दी कि आवारा और पालतू कुत्तों की सुरक्षा, स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन पर गंभीरता से ध्यान दें। अदालत ने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन में ग्राम पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम की भूमिका निर्णायक है।
सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी।