Tuesday, June 2

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भोपाल मेट्रो: हवा में तरक्की, जमीन पर वही ‘धक्का-मुक्की’

 

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भोपाल: राजधानी भोपाल में मेट्रो का संचालन शुरू हो चुका है, लेकिन यात्रियों के लिए स्टेशन तक पहुंचना अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ई-बाइक, ई-रिक्शा और बस सेवाओं की कमज़ोर कनेक्टिविटी के कारण ट्रैफिक जाम में कोई खास कमी नहीं आई है।

 

मेट्रो के बावजूद सड़कें जाम में

मेट्रो के लॉन्च के एक सप्ताह बाद भी शहर की सड़कें पहले जैसी जाम रहती हैं। सुबह और शाम के व्यस्त समय में बोर्ड ऑफिस स्क्वायर, एमपी नगर और डीबी मॉल जैसे मुख्य चौराहे कार, मोटरसाइकिल और ऑटो-रिक्शा से भरे रहते हैं।

 

कनेक्टिविटी और आखिरी मील की समस्या

यात्रियों का कहना है कि मेट्रो आरामदायक और तेज़ है, लेकिन स्टेशन तक पहुंचने के लिए फीडर कनेक्टिविटी में सुधार होना जरूरी है। बैंक कर्मचारी रितेश वर्मा ने कहा, “बेहतर कनेक्टिविटी के बिना मेट्रो का ज्यादा फायदा नहीं होता।”

 

ट्रैफिक पर असर अभी सीमित

राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जब तक मेट्रो के अन्य खंड चालू नहीं होंगे, सड़क यातायात पर इसका असर आंशिक ही रहेगा। निर्माणाधीन कॉरिडोर और संकरी गलियों के कारण कुछ जगहों पर ट्रैफिक और भी बढ़ गया है।

 

धीरे-धीरे बढ़ेगी मेट्रो की लोकप्रियता

हालांकि शुरुआती दिक्कतों के बावजूद यात्रियों ने मेट्रो की आधुनिक सुविधाओं की सराहना की है। अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि फीडर परिवहन और किराया प्रणाली के स्थिर होने पर लोग निजी वाहनों की बजाय मेट्रो का अधिक इस्तेमाल करेंगे।

 

दो हकीकतों में फंसे लोग

भोपाल में फिलहाल लोग दो अलग हकीकतों का अनुभव कर रहे हैं। ऊपर, नई मेट्रो ऊंचे ट्रैक पर खामोशी से दौड़ रही है और शहर के भविष्य का प्रतीक है। नीचे, सड़कें जाम, शोर और अराजकता से भरी हैं।

 

भोपाल मेट्रो की सफलता केवल ट्रेनों और पटरियों पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि यह शहर के सार्वजनिक परिवहन के साथ कितनी सहजता से जुड़ पाती है।

 

 

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