


बांग्लादेश में अगले साल फरवरी में आम चुनावों से पहले राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। देश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस भारत विरोधी माहौल बनाकर चुनावी लाभ लेने की कोशिश में हैं, लेकिन उनकी हर चाल बेनकाब हो रही है।
भारत पर झूठे आरोप
हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने दावा किया कि कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की हत्या के दो मुख्य संदिग्ध भारत के मेघालय में शरण लिए हुए हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इसे “मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण” बताया। बीएसएफ इंस्पेक्टर जनरल ओम प्रकाश उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है और सीमा पर निगरानी लगातार जारी है।
मेघालय डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग ने भी इस दावे को बेबुनियाद करार दिया। उनका कहना है कि बांग्लादेशी रिपोर्टों में कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।
खालिदा जिया की वापसी और यूनुस की टेंशन
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल बाद देश लौट आए हैं। उनकी वापसी से बांग्लादेश की राजनीति में नया समीकरण बन गया है। यह मोहम्मद यूनुस और कट्टरपंथी गुटों के लिए चिंता का कारण है। खालिदा जिया और पीएम मोदी के अच्छे संबंधों के कारण यूनुस को डर सता रहा है।
तारिक रहमान: भारत के लिए महत्वपूर्ण विकल्प
भारत सरकार की नजरें बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के तारिक रहमान पर टिकी हैं। वे बांग्लादेश में लोकतांत्रिक सरकार के गठन में अहम भूमिका निभा सकते हैं और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
बांग्लादेश में तनावपूर्ण स्थिति
शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद ढाका और अन्य शहरों में हिंसा फैल गई। भीड़ ने कई इलाकों में आगजनी और तोड़फोड़ की। अंतरिम सरकार ने इस मामले को भारत पर डालकर जनता की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश की, लेकिन यह दावा भी पूरी तरह झूठा साबित हुआ।
यूनुस सरकार खुद कटघरे में
भारत के पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने खुलासा किया कि जमात-ए-इस्लामी और आईएसआई चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। हादी की हत्या मौके पर हुई थी, लेकिन इसे दिखावे के लिए सिंगापुर भेजा गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि यूनुस सरकार अपने ही राजनीतिक फायदे के लिए झूठे आरोप लगा रही है।
बांग्लादेश में चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ रही है, और भारत पर आरोप लगाने की कोशिशें बेनकाब हो रही हैं।


