
राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज को विदिशा नगर की ओर से सामूहिक श्रीफल अर्पित
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में देशभर से उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

विदिशा। (सद्वार्ता)

अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर गुणायतन में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का विराट केंद्र बना हुआ है। शुक्रवार को विधान के दौरान 64 ऋद्धि मंत्रों के अर्घ्य अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं अनुशासन के साथ प्रभु चरणों में समर्पित किए गए। देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं के साथ विदिशा नगर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भी सामूहिक रूप से श्रीफल अर्पित कर धर्मलाभ प्राप्त किया। विशाल विधान मंडप मंत्रोच्चार और भक्तिभाव से गुंजायमान रहा।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन “विद्यावाणी” ने बताया कि इस अवसर पर मालेगांव से आए 8 वर्षीय बालक ऋषभ जैन को जैनत्व के संस्कार प्रदान किए गए। वहीं सिंगापुर से पधारे वैशालिका एवं पवन जैन को चक्रवर्ती विवाह के लिए मंगल आशीर्वाद प्रदान किया गया।
विधान का आयोजन राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाणसागर महाराज के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित शिखरजी में विराजमान मुनि श्री विश्वास सागर महाराज, मुनि श्री नवनीत सागर महाराज, मुनि श्री ज्ञानभूषण सागर महाराज, मुनि श्री संयम सागर महाराज, मुनि श्री सार सागर महाराज, मुनि श्री समादर सागर महाराज एवं मुनि श्री रूप सागर महाराज की मंगलमयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
विधानाचार्य अशोक भैयाजी एवं अभय भैयाजी के निर्देशन में चल रहे नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु सहभागिता कर आत्मकल्याण की भावना से आराधना कर रहे हैं। विशाल पांडाल में अनुशासित एवं भक्तिमय वातावरण के बीच मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज द्वारा प्रत्येक मंत्र का नौ बार शुद्ध उच्चारण कराया गया तथा श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक अर्घ्य समर्पित किए, जिससे संपूर्ण परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से अनुप्राणित हो उठा।
अपने प्रवचन में राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि “मंत्र केवल उच्चारण का विषय नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का माध्यम हैं। जब श्रद्धा, शुद्धि और सम्यक् भाव के साथ मंत्र साधना की जाती है, तभी वह जीवन में वास्तविक परिवर्तन का कारण बनती है।” उन्होंने कहा कि श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आत्मशुद्धि, सद्बुद्धि और सिद्धत्व की दिशा में अग्रसर होने का श्रेष्ठ आध्यात्मिक अवसर है। 64 ऋद्धि मंत्र आत्मबल, सकारात्मक चिंतन और आत्मोन्नति के प्रेरक हैं तथा इनके भावार्थ के साथ की गई आराधना ही साधना को सार्थक बनाती है।
कार्यक्रम के क्रम में शनिवार को 128 अर्घ्य, रविवार को 256 अर्घ्य, सोमवार को 512 अर्घ्य तथा मंगलवार को 1024 अर्घ्य श्रद्धालुओं द्वारा प्रभु चरणों में समर्पित किए जाएंगे। 29 जुलाई को प्रातःकाल विधान का समापन होगा, जबकि दोपहर 2:30 बजे से चातुर्मास कलश स्थापना एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के दीक्षा दिवस का आयोजन किया जाएगा।
गुणायतन एवं श्री सेवायतन परिवार ने सभी श्रद्धालुओं से इस आध्यात्मिक महोत्सव के शेष कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है।


