Friday, August 28

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हथियार लहराने पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, पूर्व मंत्री के भतीजे समेत दो रसूखदारों का आर्म्स लाइसेंस रद्द
Bihar, State

हथियार लहराने पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, पूर्व मंत्री के भतीजे समेत दो रसूखदारों का आर्म्स लाइसेंस रद्द

सीतामढ़ी। जिले में हथियार का प्रदर्शन और उसे स्टेटस सिंबल के रूप में दिखाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। सीतामढ़ी के जिलाधिकारी (डीएम) रिची पांडेय ने लाइसेंसी हथियार का दुरुपयोग करने के आरोप में जिले के दो रसूखदार व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इस कार्रवाई में शामिल एक व्यक्ति पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवंगत शाहिद अली खां के भतीजे शादाब अहमद खान हैं, जबकि दूसरा व्यक्ति निशित सिंह है, जिसकी छवि आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति के रूप में बताई जा रही है। डीएम द्वारा एक साथ दो लोगों के हथियार लाइसेंस रद्द किए जाने का फैसला जिले में चर्चा का विषय बन गया है। एसपी की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई एसपी अमित रंजन द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर की गई है। रिपोर्ट में दोनों व्यक्तियों द्वारा लाइसेंसी हथियार का प्रदर्श...
विधायकों का फोन नहीं उठाया तो कमांड सेंटर से जाएगा अलर्ट, ‘संवाद सेतु’ एप से बनेगा सीधा संपर्क
Politics, State, Uttar Pradesh

विधायकों का फोन नहीं उठाया तो कमांड सेंटर से जाएगा अलर्ट, ‘संवाद सेतु’ एप से बनेगा सीधा संपर्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन कॉल न उठाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। हाल ही में यह मुद्दा विधानसभा में जोर-शोर से उठाए जाने के बाद सरकार ने अब इस पर सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकार ने निर्णय लिया है कि यदि कोई अधिकारी विधायक या जनप्रतिनिधि का फोन समय पर रिसीव नहीं करता है, तो कमांड सेंटर से तत्काल अलर्ट जारी किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत जनप्रतिनिधियों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ‘संवाद सेतु’ एप (Samvad Setu App) विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद को मजबूत किया जाएगा। 10 मिनट में कॉल बैक करना होगा अनिवार्य नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा किसी अधिकारी को कॉल किया जाता है, तो अधिकारी को कॉल रिसीव करना अनिवार्य होगा। यदि किसी कारणवश अधिकारी कॉल न...
नोएडा में बसंत की बहार, शिवालिक पार्क में आज से भव्य फ्लावर शो का आगाज़
State, Uttar Pradesh

नोएडा में बसंत की बहार, शिवालिक पार्क में आज से भव्य फ्लावर शो का आगाज़

नोएडा। बसंत ऋतु की शुरुआत के साथ ही नोएडा में रंग-बिरंगे फूलों की छटा बिखर गई है। शहर के सेक्टर-33 स्थित शिवालिक पार्क में आज से भव्य फ्लावर शो (पुष्प प्रदर्शनी) की शुरुआत हो रही है। यह पुष्प प्रदर्शनी 22 फरवरी तक आयोजित की जाएगी। खास बात यह है कि इस आयोजन में आमजन के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। फ्लावर शो का उद्घाटन आज दोपहर 2 बजे किया जाएगा, जिसमें स्थानीय सांसद सहित कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे। पार्क को रंगीन फूलों, सजावटी पौधों और आकर्षक रोशनी से विशेष रूप से सजाया गया है। इस बार थीम आधारित फूलों की आकृतियां प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण होंगी। अधिकारियों के अनुसार, इस बार फ्लावर शो में पहले की तुलना में अधिक विविधता और रचनात्मकता देखने को मिलेगी। प्रदर्शनी में देश-विदेश की कई दुर्लभ प्रजातियों के फूल शामिल किए गए हैं। यहां गुलाब, गेंदा, ऑर्किड, पेटूनिया, डहेलिया, लिली सहित ...
AI समिट और क्रिकेट मैच ने बढ़ाई दिल्ली की मुश्किलें, दिनभर जाम में फंसी रही राजधानी, वैकल्पिक मार्ग भी रहे बेअसर
Delhi (National Capital Territory), State

AI समिट और क्रिकेट मैच ने बढ़ाई दिल्ली की मुश्किलें, दिनभर जाम में फंसी रही राजधानी, वैकल्पिक मार्ग भी रहे बेअसर

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बुधवार का दिन आम लोगों के लिए भारी परेशानी लेकर आया। AI समिट के चलते VVIP मूवमेंट और दूसरी ओर क्रिकेट मैच के कारण शहर के कई इलाकों में दिनभर भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। हालात ऐसे हो गए कि सुबह से लेकर देर रात तक लोगों को सड़कों पर लंबा इंतजार करना पड़ा। जाम से बचने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक मार्गों की सलाह जरूर दी, लेकिन बढ़ते दबाव के सामने वैकल्पिक रास्ते भी नाकाम साबित हुए। VVIP मूवमेंट से ठप रही कई अहम सड़कें AI समिट के कारण दिल्ली में बड़ी संख्या में विदेशी मेहमानों और राष्ट्राध्यक्षों की आवाजाही रही। इस दौरान कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई, जिससे ट्रैफिक पर सीधा असर पड़ा।सुबह से ही आउटर रिंग रोड और रिंग रोड से जुड़ने वाले मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोग ऑफिस, स्कूल और अन्य जरूरी कामों के लिए निकल तो पड़े,...
दिल्ली में सड़क निर्माण टेंडर पर उठे सवाल, आधे से भी कम कीमत पर मिला काम, एमसीडी पर धांधली के आरोप
Delhi (National Capital Territory), State

दिल्ली में सड़क निर्माण टेंडर पर उठे सवाल, आधे से भी कम कीमत पर मिला काम, एमसीडी पर धांधली के आरोप

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सड़क निर्माण से जुड़े एक टेंडर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एमसीडी (नगर निगम दिल्ली) के शाहदरा नॉर्थ जोन के प्रोजेक्ट-1 डिविजन द्वारा करावल नगर विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए जारी किए गए टेंडर में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, एमसीडी ने जिस सड़क निर्माण कार्य के लिए 2 करोड़ 25 लाख 76 हजार 446 रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया था, उसी कार्य को एक कंपनी ने 55 प्रतिशत कम कीमत पर करने की पेशकश की और टेंडर हासिल भी कर लिया। अब सवाल उठ रहा है कि इतनी कम राशि में सड़क का निर्माण आखिर कैसे संभव होगा और अगर सड़क बन भी गई तो उसकी गुणवत्ता कितनी टिकाऊ होगी। शहीद दिनेश चंद्र शर्मा मार्ग और करावल नगर पुश्ता रोड का मामला एमसीडी शाहदरा नॉर्थ जोन के तहत आने वाले शहीद दिनेश चंद्र शर्मा मार्ग ...
जींद में CM नायब सिंह सैनी का दिल जीतने वाला अंदाज, युवक की पुकार पर हेलिकॉप्टर में बैठाकर पूरी की ख्वाहिश
State

जींद में CM नायब सिंह सैनी का दिल जीतने वाला अंदाज, युवक की पुकार पर हेलिकॉप्टर में बैठाकर पूरी की ख्वाहिश

जींद। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का एक मानवीय और सरल व्यवहार वाला वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला जींद जिले के उचाना विधानसभा क्षेत्र का है, जहां मुख्यमंत्री एक जनसभा के दौरान विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने पहुंचे थे। इसी कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने भीड़ में खड़े एक युवक की इच्छा को तुरंत पूरा कर लोगों का दिल जीत लिया। दरअसल, उचाना में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 103 करोड़ 30 लाख 84 हजार रुपये की लागत वाली पांच विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर से रवाना होने लगे, तो सुरक्षा के चलते वहां बैरिकेडिंग लगाई गई थी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। भीड़ से आई आवाज- ‘ताऊ, हमें भी बिठा ले हेलिकॉप्टर में’ इसी दौरान भीड़ में से एक युवक ने हरियाणवी अंदाज ...
कांग्रेस ने छत्रपति यादव और आनंद माधव को 6 साल के लिए पार्टी से निकाला, बिहार कांग्रेस में सियासी भूचाल
Bihar, State

कांग्रेस ने छत्रपति यादव और आनंद माधव को 6 साल के लिए पार्टी से निकाला, बिहार कांग्रेस में सियासी भूचाल

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद कांग्रेस के अंदर चल रहा घमासान अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी नेतृत्व के खिलाफ लगातार बयानबाजी और अनुशासनहीन गतिविधियों के आरोप में बिहार कांग्रेस ने अपने दो वरिष्ठ नेताओं छत्रपति यादव और आनंद माधव को बड़ा झटका देते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद बिहार कांग्रेस की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजेश राठौड़ ने निष्कासन की पुष्टि बिहार कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष राजेश राठौड़ ने बुधवार को इस निष्कासन की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य अनुशासन समिति ने यह फैसला दोनों नेताओं के लगातार दिए जा रहे “अवांछनीय और पार्टी विरोधी” बयानों को देखते हुए लिया है। राठौड़ ने कहा कि छत्रपति यादव और आनंद माधव लंबे समय से पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नियमित अंतराल पर प्रेस बयान जारी कर रहे थे। ...
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा, निजी अंग पकड़ना और नाड़ा खोलना ‘दुष्कर्म के प्रयास’ की श्रेणी में
State, Uttar Pradesh

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा, निजी अंग पकड़ना और नाड़ा खोलना ‘दुष्कर्म के प्रयास’ की श्रेणी में

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले को लेकर हाल के दिनों में देशभर में बहस छिड़ गई थी। हाई कोर्ट ने एक मामले में यह कहते हुए दुष्कर्म के प्रयास की धाराओं को हटाने का आदेश दिया था कि युवती के निजी अंग पकड़ना और कपड़ों के नाड़े से छेड़छाड़ करना ‘दुष्कर्म की कोशिश’ नहीं बल्कि केवल ‘तैयारी’ है। अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है और स्पष्ट किया है कि ऐसी हरकतें दुष्कर्म के प्रयास का अपराध बनती हैं। चीफ जस्टिस की पीठ ने सुनाया अहम फैसला इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्थापित आपराधिक कानून के सिद्धांतों की गलत व्याख्या और गलत इस्तेमाल किया है। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कासगंज के व...
कानपुर। उत्तर प्रदेश में भूकंप को लेकर लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के झटके यूपी तक महसूस किए गए थे, जिससे प्रदेश के कई इलाकों में दहशत फैल गई थी। हालांकि उस घटना के बाद भी भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा को लेकर कोई ठोस तैयारी नहीं हो सकी। अब आईआईटी कानपुर की एक विस्तृत रिसर्च ने प्रदेश के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है।  आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों के अनुसार यदि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में 6.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो कानपुर और प्रयागराज में भारी तबाही हो सकती है। रिसर्च के मुताबिक इन दोनों शहरों की मिट्टी की संरचना ऐसी है, जो भूकंप के दौरान लिक्विफेक्शन जैसी खतरनाक प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकती है।  लिक्विफेक्शन से सबसे बड़ा खतरा  सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के अनुसार कानपुर और प्रयागराज की जमीन में बालू की मात्रा अधिक है और इसके कण बेहद महीन हैं। भूकंप के तेज झटकों से मिट्टी की मजबूती कमजोर हो जाती है और जमीन के नीचे मौजूद पानी व सिल्टयुक्त बालू मिलकर ऊपर की ओर आने लगते हैं। इसी प्रक्रिया को लिक्विफेक्शन कहा जाता है।  इस स्थिति में जमीन का व्यवहार लगभग तरल जैसा हो जाता है, जिससे इमारतों की नींव कमजोर पड़ सकती है और बड़े-बड़े पक्के ढांचे धंस सकते हैं या गिर सकते हैं।  इतिहास में भी दर्ज हुई थीं घटनाएं  रिसर्च में यह भी बताया गया कि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में 1803 और 1934 के बड़े भूकंपों के बाद लिक्विफेक्शन की घटनाएं दर्ज की गई थीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह क्षेत्र भूकंपीय फॉल्ट के प्रभाव क्षेत्र में भी आता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।  30 से 40 मीटर गहराई तक असर की संभावना  आमतौर पर भूकंप के दौरान लिक्विफेक्शन का असर 8 से 10 मीटर की गहराई तक देखा जाता है, लेकिन आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार कानपुर और प्रयागराज में यह प्रभाव 30 से 40 मीटर तक जा सकता है।  रिसर्च के लिए दोनों शहरों में 20-20 स्थानों से मिट्टी के नमूने लिए गए। कानपुर में गंगा बैराज के पास 70 से 80 मीटर गहराई तक बोरहोल के जरिए सैंपल इकट्ठे किए गए।  इस अध्ययन में गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में भी सर्वे किया गया। इसके साथ ही लखनऊ और वाराणसी के कुछ इलाकों में भी लिक्विफेक्शन की संभावना का आकलन किया गया।  सिस्मिक जोन-3 और जोन-4 में आते हैं दोनों शहर  रिसर्च में बताया गया कि कानपुर और प्रयागराज सिस्मिक जोन-3 और जोन-4 में आते हैं और हिमालय से लगभग 300 किलोमीटर की परिधि में स्थित हैं। यहां की मिट्टी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है, इसलिए निर्माण कार्य के दौरान विशेष सावधानी और आधुनिक ग्राउंड इम्प्रूवमेंट तकनीक अपनाने की जरूरत है।  विशेषज्ञों की चेतावनी  विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते शहरी नियोजन, निर्माण मानकों और भूकंपरोधी तकनीकों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो भविष्य में आने वाला कोई भी बड़ा भूकंप कानपुर और प्रयागराज के लिए गंभीर तबाही का कारण बन सकता है।  आईआईटी कानपुर की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में अब भूकंप को लेकर सतर्कता और तैयारी को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी हो गया है।
Rajasthan, State

कानपुर। उत्तर प्रदेश में भूकंप को लेकर लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के झटके यूपी तक महसूस किए गए थे, जिससे प्रदेश के कई इलाकों में दहशत फैल गई थी। हालांकि उस घटना के बाद भी भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा को लेकर कोई ठोस तैयारी नहीं हो सकी। अब आईआईटी कानपुर की एक विस्तृत रिसर्च ने प्रदेश के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों के अनुसार यदि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में 6.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो कानपुर और प्रयागराज में भारी तबाही हो सकती है। रिसर्च के मुताबिक इन दोनों शहरों की मिट्टी की संरचना ऐसी है, जो भूकंप के दौरान लिक्विफेक्शन जैसी खतरनाक प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकती है। लिक्विफेक्शन से सबसे बड़ा खतरा सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के अनुसार कानपुर और प्रयागराज की जमीन में बालू की मात्रा अधिक है और इसके कण बेहद महीन हैं। भूकंप के तेज झटकों से मिट्टी की मजबूती कमजोर हो जाती है और जमीन के नीचे मौजूद पानी व सिल्टयुक्त बालू मिलकर ऊपर की ओर आने लगते हैं। इसी प्रक्रिया को लिक्विफेक्शन कहा जाता है। इस स्थिति में जमीन का व्यवहार लगभग तरल जैसा हो जाता है, जिससे इमारतों की नींव कमजोर पड़ सकती है और बड़े-बड़े पक्के ढांचे धंस सकते हैं या गिर सकते हैं। इतिहास में भी दर्ज हुई थीं घटनाएं रिसर्च में यह भी बताया गया कि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में 1803 और 1934 के बड़े भूकंपों के बाद लिक्विफेक्शन की घटनाएं दर्ज की गई थीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह क्षेत्र भूकंपीय फॉल्ट के प्रभाव क्षेत्र में भी आता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। 30 से 40 मीटर गहराई तक असर की संभावना आमतौर पर भूकंप के दौरान लिक्विफेक्शन का असर 8 से 10 मीटर की गहराई तक देखा जाता है, लेकिन आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार कानपुर और प्रयागराज में यह प्रभाव 30 से 40 मीटर तक जा सकता है। रिसर्च के लिए दोनों शहरों में 20-20 स्थानों से मिट्टी के नमूने लिए गए। कानपुर में गंगा बैराज के पास 70 से 80 मीटर गहराई तक बोरहोल के जरिए सैंपल इकट्ठे किए गए। इस अध्ययन में गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में भी सर्वे किया गया। इसके साथ ही लखनऊ और वाराणसी के कुछ इलाकों में भी लिक्विफेक्शन की संभावना का आकलन किया गया। सिस्मिक जोन-3 और जोन-4 में आते हैं दोनों शहर रिसर्च में बताया गया कि कानपुर और प्रयागराज सिस्मिक जोन-3 और जोन-4 में आते हैं और हिमालय से लगभग 300 किलोमीटर की परिधि में स्थित हैं। यहां की मिट्टी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है, इसलिए निर्माण कार्य के दौरान विशेष सावधानी और आधुनिक ग्राउंड इम्प्रूवमेंट तकनीक अपनाने की जरूरत है। विशेषज्ञों की चेतावनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते शहरी नियोजन, निर्माण मानकों और भूकंपरोधी तकनीकों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो भविष्य में आने वाला कोई भी बड़ा भूकंप कानपुर और प्रयागराज के लिए गंभीर तबाही का कारण बन सकता है। आईआईटी कानपुर की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में अब भूकंप को लेकर सतर्कता और तैयारी को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी हो गया है।

जयपुर। बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में जांच एजेंसियों ने सख्ती बढ़ा दी है। करीब 900 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि वह विदेश फरार हो सकते हैं, इसी के मद्देनज़र यह कदम उठाया गया है। जानकारी के अनुसार, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 17 फरवरी को सुबोध अग्रवाल के आवास पर तलाशी ली थी, लेकिन वह मौके पर मौजूद नहीं मिले। इसके बाद से उनकी तलाश तेज कर दी गई है। 9 अफसर गिरफ्तार, कोर्ट ने 3 दिन की रिमांड मंजूर ACB ने इस मामले में जलदाय विभाग से जुड़े नौ अधिकारियों को गिरफ्तार कर गुरुवार को अदालत में पेश किया। अदालत ने सभी आरोपियों को तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया है। एजेंसी ने पांच दिन की रिमांड की मांग की थी, हालांकि अदालत ने सीमित अवधि ही स्वीकृत की।रिमांड के दौरान घोटाले से जुड़े दस्तावेजो...
IIT कानपुर की रिसर्च से बढ़ी चिंता: बड़े भूकंप में कानपुर और प्रयागराज को सबसे ज्यादा खतरा, लिक्विफेक्शन से भारी नुकसान की आशंका
State, Uttar Pradesh

IIT कानपुर की रिसर्च से बढ़ी चिंता: बड़े भूकंप में कानपुर और प्रयागराज को सबसे ज्यादा खतरा, लिक्विफेक्शन से भारी नुकसान की आशंका

कानपुर। उत्तर प्रदेश में भूकंप को लेकर लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के झटके यूपी तक महसूस किए गए थे, जिससे प्रदेश के कई इलाकों में दहशत फैल गई थी। हालांकि उस घटना के बाद भी भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा को लेकर कोई ठोस तैयारी नहीं हो सकी। अब आईआईटी कानपुर की एक विस्तृत रिसर्च ने प्रदेश के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों के अनुसार यदि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में 6.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो कानपुर और प्रयागराज में भारी तबाही हो सकती है। रिसर्च के मुताबिक इन दोनों शहरों की मिट्टी की संरचना ऐसी है, जो भूकंप के दौरान लिक्विफेक्शन जैसी खतरनाक प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकती है। लिक्विफेक्शन से सबसे बड़ा खतरा सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के अनुसार कानपुर और प्रयागराज की जमीन में बालू की मात...