बिहार में नक्सलवाद का अंत: सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण के साथ ‘लाल आतंक’ की आखिरी दास्तान
पटना: एक समय बिहार में नक्सलवाद ने राज्य के एक तिहाई हिस्से पर अपनी पैठ जमा रखी थी। जहानाबाद, भोजपुर, गया और जमुई जैसे जिलों में शाम ढलते ही सन्नाटा छा जाता था और पुलिस भी नक्सल प्रभावित इलाकों में कदम रखने से कतराती थी। लेकिन अब साल 2026 में बिहार पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है।
नक्सलवाद की शुरुआत
बिहार में नक्सलवाद की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल में शुरू हुई सशस्त्र क्रांति की चिंगारी से हुई। भोजपुर जिले में भाकपा माले ने पहला आंदोलन खड़ा किया। 80 और 90 के दशक तक एमसीसी (माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर) ने जहानाबाद, औरंगाबाद और गया जिलों को अपना गढ़ बना लिया। 21 सितंबर 2004 को पीपुल्स वार और एमसीसी के विलय के बाद भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ और नक्सलियों की ताकत चरम पर पहुँच गई।
नक्सलियों का प्रभाव धीरे-धीरे कम हुआ
2013 में बिहार के 22 जिले नक्सल प्रभावित घोषित थे।
सरकार की पुनर...










