सतना रेलवे स्टेशन के 42 कुली परिवारों पर संकट: घटती कमाई, बढ़ती मजबूरी और उजड़ता भविष्य
सतना।
भारतीय रेलवे की पहचान रहे लाल शर्ट पहने, बाजू पर पीतल का बिल्ला लगाए और “साहब… कुली!” की आवाज़ लगाते कुली अब इतिहास बनते जा रहे हैं। सतना रेलवे स्टेशन पर दशकों से यात्रियों का बोझ उठाने वाला कुली समुदाय आज खुद जीवन का बोझ उठाने को मजबूर है। रेलवे के आधुनिकीकरण ने यात्रियों को सुविधा दी, लेकिन कुलियों से उनका रोजगार छीन लिया।
नवभारत टाइम्स की टीम ने जब सतना स्टेशन पर कुलियों की हकीकत जानी, तो उनकी पीड़ा शब्दों से बाहर छलक पड़ी।
ट्रॉली बैग बना रोज़ी-रोटी का सबसे बड़ा दुश्मन
देशभर में जहां करीब 20 हजार लाइसेंसधारी कुली हैं, वहीं मध्यप्रदेश के सतना रेलवे स्टेशन पर केवल 42 कुली बचे हैं, जिनमें एक महिला कुली भी शामिल है। इन कुलियों का कहना है कि चक्के वाले ट्रॉली बैग, एस्केलेटर और लिफ्ट ने उनके हाथों से काम छीन लिया है।
पहले भारी ट्रंक औ...










