Saturday, August 15

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भारत-पाक सीमा पर बीएसएफ का ‘ऑपरेशन सर्द हवा’, दुर्गा वाहिनी की तैनाती से घुसपैठ पर लगेगा ब्रेक
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भारत-पाक सीमा पर बीएसएफ का ‘ऑपरेशन सर्द हवा’, दुर्गा वाहिनी की तैनाती से घुसपैठ पर लगेगा ब्रेक

    भारत-पाकिस्तान सीमा पर सर्दियों में बढ़ने वाली घुसपैठ की आशंकाओं को देखते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने एक बार फिर कड़े सुरक्षा इंतज़ामों की तैयारी कर ली है। जम्मू-कश्मीर और राजस्थान सेक्टर में जल्द ही ‘ऑपरेशन सर्द हवा’ शुरू किया जाएगा, जिसके तहत निगरानी, गश्त और तकनीकी संसाधनों को कई गुना बढ़ाया जाएगा। इस विशेष अभियान में बीएसएफ की ‘दुर्गा वाहिनी’ इकाइयों की भी तैनाती की जाएगी, जो इसे और अधिक सशक्त बनाती है।   बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान जनवरी के अंत तक जारी रहेगा। गणतंत्र दिवस से पहले का समय सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। सर्दियों में घना कोहरा और धुंध घुसपैठियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है, जिसका फायदा उठाकर सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें की जाती हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है।   नि...
जलपाईगुड़ी में जन्मी, फिर भी भारत विरोधी रुख अपनाया: खालिदा जिया पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई कठिन दौर देखे
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जलपाईगुड़ी में जन्मी, फिर भी भारत विरोधी रुख अपनाया: खालिदा जिया पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में कई कठिन दौर देखे

    नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और BNP की अध्यक्ष खालिदा जिया का मंगलवार तड़के लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं और चार दशकों से अधिक समय तक बांग्लादेश की राजनीति में एक प्रमुख हस्ती रहीं।   भारत में हुआ जन्म   खालिदा जिया का जन्म 1945 में अविभाजित भारत के जलपाईगुड़ी में हुआ था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में आ गया। 1960 में उन्होंने जियाउर रहमान से शादी की, जो बाद में बांग्लादेश के राष्ट्रपति और BNP के संस्थापक बने।   राजनीतिक सफर   1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद बीएनपी संकट में पड़ गई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने खालिदा जिया से नेतृत्व संभालने का आग्रह किया। 1984 में उन्हें पार्टी की अध्यक्ष चुना गया और उन्होंने 1991 में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप...
बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का निधन80 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद शांति से खत्म हुआ चार दशक का राजनीतिक सफर
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बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का निधन80 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद शांति से खत्म हुआ चार दशक का राजनीतिक सफर

  नई दिल्ली: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 80 वर्ष की थीं। खालिदा जिया का राजनीतिक जीवन चार दशकों से अधिक का रहा, जिसमें सत्ता में आना, विपक्ष में रहना और भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना शामिल है।   1991 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद खालिदा जिया की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हमेशा शेख हसीना रहीं। उनके दूसरे कार्यकाल (2001) में भारत के साथ रिश्ते उतने बेहतर नहीं रहे और उन पर भारत विरोधी बयानबाजी के आरोप लगे। बाद में विपक्ष में रहते हुए यूपीए सरकार के दौरान भारत-बांग्लादेश रिश्तों में सुधार की कोशिशें हुईं।   भारत दौरे और विवाद   नवंबर 2012 में भारत आने पर खालिदा जिया ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह से मुलाकात की और कहा कि वह खुले मन से आई हैं और पुराने मतभेद खत्म कर...
50 लाख तक का जॉइनिंग बोनस! इंडिगो और एयर इंडिया में पायलट भर्ती को लेकर मचा घमासान
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50 लाख तक का जॉइनिंग बोनस! इंडिगो और एयर इंडिया में पायलट भर्ती को लेकर मचा घमासान

    नई दिल्ली: इंडिगो संकट के बाद भारतीय एयरलाइन इंडस्ट्री में पायलटों की भर्ती को लेकर हलचल बढ़ गई है। देश की दो बड़ी एयरलाइंस इंडिगो और एयर इंडिया अनुभवी पायलटों को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने के लिए एक-दूसरे से टक्कर ले रही हैं।   इंडिगो ने DGCA को वादा किया है कि जनवरी में 100 नए पायलटों को शामिल किया जाएगा, जबकि एयर इंडिया ने अपने पायलटों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिए हैं। हाल ही में कई पायलट दोनों एयरलाइंस और विदेशी एयरलाइंस में नौकरी बदल रहे हैं, जिससे मौजूदा संख्या बनाए रखने के लिए हायरिंग बढ़ाई जा रही है।   पहली बार HR डिपार्टमेंट बैकफुट पर   एयरलाइन के HR विभाग ने पहली बार इतनी बड़ी घटना के बाद कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का विरोध नहीं किया। इंडिगो और एयर इंडिया के कई अनुभवी पायलटों को ₹50 लाख तक का जॉइनिंग बोनस मिलने की खबरें हैं। &...
अरावली की नई परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया बड़ा फैसला उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति करेगी अंतिम फैसला, पर्यावरण संरक्षण और खनन दोनों पर होगी संतुलित निगरानी
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अरावली की नई परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया बड़ा फैसला उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति करेगी अंतिम फैसला, पर्यावरण संरक्षण और खनन दोनों पर होगी संतुलित निगरानी

  नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा पर 20 नवंबर का अपना फैसला वापस ले लिया है। कोर्ट ने प्रस्ताव रखा है कि इस विषय में एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई जाए, जो पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर अंतिम निर्णय करेगी।   सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा से कहीं संरचनात्मक विरोधाभास तो नहीं पैदा हो गया है और क्या इससे गैर-अरावली क्षेत्रों का दायरा बढ़कर अनियंत्रित खनन को बढ़ावा तो नहीं मिल रहा।   समिति के काम और उद्देश्‍य   चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि समिति उन क्षेत्रों की पहचान करेगी, जिन्हें अरावली से बाहर रखा जा सकता है। साथ ही यह सुनिश्चित करेगी कि प्राकृतिक पर्यावरण और पारिस्थितिक संतुलन को कोई नुकसान न पहुंचे।   अदालत ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि और वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. परमेश्वर से समिति ...
बिलकुल! आपके कंटेंट को समाचार-पत्र की शैली में प्रभावशाली और पठनीय हिंदी में इस तरह लिखा जा सकता है:  —  ### POCSO कानून में ‘लोक सेवक’ की परिभाषा तय करेगी सुप्रीम कोर्ट  **उन्नाव रेप मामला: कुलदीप सिंह सेंगर जेल में ही रहेंगे, हाई कोर्ट के सजा निलंबन आदेश पर शीर्ष अदालत ने लगाई रोक**  **नई दिल्ली:** सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 2017 के उन्नाव रेप मामले में बीजेपी से निष्कासित नेता **कुलदीप सिंह सेंगर** की उम्रकैद की सजा को सस्पेंड किया गया था। अब सेंगर जेल से रिहा नहीं होंगे।  सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस **जे.के. महेश्वरी** ने इस मामले में सवाल उठाया कि हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट क्यों नहीं किया कि सेंगर **IPC की धारा 376(2)(i)** के तहत दोषी हैं या नहीं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि **POCSO कानून के तहत ‘लोक सेवक’ की परिभाषा क्या होगी** और ऐसे मामलों में सजा निलंबन के मानदंड क्या होने चाहिए।  अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता को **विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने का पूर्ण अधिकार** है और इसके लिए उसे सुप्रीम कोर्ट से कोई अलग अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। यदि पीड़िता को कानूनी मदद की जरूरत हो, तो **सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमिटी** उसे नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान करेगी। पीड़िता अपने स्वयं के वकील के माध्यम से भी अपील दायर कर सकती हैं।  सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने अपने तर्क में **एल.के. आडवाणी मामले** का हवाला दिया। इसमें कहा गया कि सांसद या विधायक जैसे **सार्वजनिक पद धारण करने वाले किसी भी व्यक्ति को ‘लोक सेवक’ माना जाएगा**। सीबीआई ने यह भी बताया कि हाई कोर्ट ने यह गलत निर्णय लिया कि अपराध के समय विधायक रहे सेंगर को **POCSO अधिनियम के तहत लोक सेवक नहीं माना जा सकता**, और उन्हें निलंबन प्रदान किया।  सीबीआई ने हाई कोर्ट की व्याख्या को भी चुनौती दी और कहा कि एक वर्तमान विधायक **राज्य और समाज के प्रति उच्च स्तर की जिम्मेदारी और जनता के विश्वास के अधिकारी** होते हैं। POCSO अधिनियम का उद्देश्य और मंशा ऐसे अपराधों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।  सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला POCSO अधिनियम की व्याख्या और ‘लोक सेवक’ की कानूनी परिभाषा दोनों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।  —  अगर आप चाहें तो मैं इसे और **अखबार के फ्रंट पेज के लिए आकर्षक हेडलाइन और सबहेडलाइन के साथ संक्षिप्त संस्करण** भी तैयार कर दूँ, जो सीधे प्रकाशन के लिए इस्तेमाल हो सके।  क्या मैं वह संस्करण भी बना दूँ?
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बिलकुल! आपके कंटेंट को समाचार-पत्र की शैली में प्रभावशाली और पठनीय हिंदी में इस तरह लिखा जा सकता है: — ### POCSO कानून में ‘लोक सेवक’ की परिभाषा तय करेगी सुप्रीम कोर्ट **उन्नाव रेप मामला: कुलदीप सिंह सेंगर जेल में ही रहेंगे, हाई कोर्ट के सजा निलंबन आदेश पर शीर्ष अदालत ने लगाई रोक** **नई दिल्ली:** सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 2017 के उन्नाव रेप मामले में बीजेपी से निष्कासित नेता **कुलदीप सिंह सेंगर** की उम्रकैद की सजा को सस्पेंड किया गया था। अब सेंगर जेल से रिहा नहीं होंगे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस **जे.के. महेश्वरी** ने इस मामले में सवाल उठाया कि हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट क्यों नहीं किया कि सेंगर **IPC की धारा 376(2)(i)** के तहत दोषी हैं या नहीं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि **POCSO कानून के तहत ‘लोक सेवक’ की परिभाषा क्या होगी** और ऐसे मामलों में सजा निलंबन के मानदंड क्या होने चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता को **विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने का पूर्ण अधिकार** है और इसके लिए उसे सुप्रीम कोर्ट से कोई अलग अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। यदि पीड़िता को कानूनी मदद की जरूरत हो, तो **सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमिटी** उसे नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान करेगी। पीड़िता अपने स्वयं के वकील के माध्यम से भी अपील दायर कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने अपने तर्क में **एल.के. आडवाणी मामले** का हवाला दिया। इसमें कहा गया कि सांसद या विधायक जैसे **सार्वजनिक पद धारण करने वाले किसी भी व्यक्ति को ‘लोक सेवक’ माना जाएगा**। सीबीआई ने यह भी बताया कि हाई कोर्ट ने यह गलत निर्णय लिया कि अपराध के समय विधायक रहे सेंगर को **POCSO अधिनियम के तहत लोक सेवक नहीं माना जा सकता**, और उन्हें निलंबन प्रदान किया। सीबीआई ने हाई कोर्ट की व्याख्या को भी चुनौती दी और कहा कि एक वर्तमान विधायक **राज्य और समाज के प्रति उच्च स्तर की जिम्मेदारी और जनता के विश्वास के अधिकारी** होते हैं। POCSO अधिनियम का उद्देश्य और मंशा ऐसे अपराधों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला POCSO अधिनियम की व्याख्या और ‘लोक सेवक’ की कानूनी परिभाषा दोनों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। — अगर आप चाहें तो मैं इसे और **अखबार के फ्रंट पेज के लिए आकर्षक हेडलाइन और सबहेडलाइन के साथ संक्षिप्त संस्करण** भी तैयार कर दूँ, जो सीधे प्रकाशन के लिए इस्तेमाल हो सके। क्या मैं वह संस्करण भी बना दूँ?

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 2017 के उन्नाव रेप मामले में बीजेपी से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को सस्पेंड किया गया था। अब सेंगर जेल से रिहा नहीं होंगे।   सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. महेश्वरी ने इस मामले में सवाल उठाया कि हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट क्यों नहीं किया कि सेंगर IPC की धारा 376(2)(i) के तहत दोषी हैं या नहीं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि POCSO कानून के तहत ‘लोक सेवक’ की परिभाषा क्या होगी और ऐसे मामलों में सजा निलंबन के मानदंड क्या होने चाहिए।   अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता को विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने का पूर्ण अधिकार है और इसके लिए उसे सुप्रीम कोर्ट से कोई अलग अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। यदि पीड़िता...
बिना इंजन के समंदर में रवाना हुआ भारतीय नौसेना का ऐतिहासिक जहाज INSV कौंडिन्य
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बिना इंजन के समंदर में रवाना हुआ भारतीय नौसेना का ऐतिहासिक जहाज INSV कौंडिन्य

    IIT मद्रास की तकनीकी मदद और प्राचीन नौकायन कला से तैयार, संजीव सान्याल ने बताया इसका ऐतिहासिक महत्व   नई दिल्ली: भारतीय नौसेना का ऐतिहासिक पोत INSV कौंडिन्य 20 दिसंबर को गुजरात के पोरबंदर से ओमान की राजधानी मस्कट के लिए अपनी पहली समुद्री यात्रा पर रवाना हो गया। यह जहाज बिना इंजन और आधुनिक प्रणोदन प्रणाली के केवल पाल और हवा के सहारे समुद्र की यात्रा करेगा।   यह जहाज भारतीय प्राचीन समुद्री मार्गों का पुनर्मूल्यांकन करता है, जो सदियों पहले भारत को पश्चिम एशिया से जोड़ते थे। इस यात्रा का उद्देश्य न केवल समुद्री यात्रा का अनुभव है, बल्कि इतिहास, शिल्पकला और आधुनिक नौसैनिक विशेषज्ञता का अनोखा संगम भी प्रस्तुत करना है।   पाँचवीं शताब्दी की तकनीक से निर्मित जहाज INSV कौंडिन्य को 5वीं शताब्दी ईस्वी की जहाज निर्माण तकनीक से तैयार किया गया है। इसे “सिला हुआ जहाज”...
पहलगाम जैसे बड़े आतंकी हमले की फिर साजिश, हिंदुओं को बना सकते हैं निशाना: सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी
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पहलगाम जैसे बड़े आतंकी हमले की फिर साजिश, हिंदुओं को बना सकते हैं निशाना: सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी

    नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के जंगलों में इस समय लगभग 150 पाकिस्तानी आतंकी छिपे हुए हैं, जो किसी बड़े हमले का इंतजार कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान ने अपनी आतंकवाद की रणनीति बदल दी है। अब आतंकवादी रोजमर्रा की छिटपुट घटनाओं से परहेज कर रहे हैं और केवल बड़े, भड़काऊ हमलों के लिए ऑर्डर का इंतजार कर रहे हैं।   2025 में भारत दो बड़े आतंकवादी हमलों का शिकार हुआ। अप्रैल में बैसरन घाटी, पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने हिंदू पर्यटकों पर हमला किया, जिसमें 26 लोगों की जान गई। वहीं, नवंबर में लाल किले के पास एक कश्मीरी डॉक्टर ने फिदायीन हमला किया, जिसमें कम से कम 15 लोगों की जान चली गई।   एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "कश्मीर में सुरक्षा और स्थिरता का मिथक अब टूट चुका है। स्थानीय आतंकियों की संख्या अब सिंगल डिजिट में रह गई है...
बच्चे का जेंडर केवल शारीरिक बनावट से तय नहीं होता: AIIMS निदेशक
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बच्चे का जेंडर केवल शारीरिक बनावट से तय नहीं होता: AIIMS निदेशक

    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने बच्चों की जेंडर पहचान को लेकर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि जन्म के समय केवल बाहरी जननांगों को देखकर यह तय कर लेना कि बच्चा लड़का है या लड़की, वैज्ञानिक और चिकित्सकीय रूप से सही नहीं है।   डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, कुछ नवजात शिशुओं में ऐसी स्थिति होती है, जहां केवल शारीरिक बनावट के आधार पर जेंडर की पहचान संभव नहीं होती। ऐसे मामलों में जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला बच्चे के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर नुकसानदायक हो सकता है।   उन्होंने बताया कि इन विशेष मामलों में अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और क्रोमोसोम जांच जैसी चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के बाद ही सही स्थिति स्पष्ट होती है। चिकित्सा विज्ञान में ऐसे बच्चों को ‘डिफरेंसेज ऑफ सेक्स डेवलपमेंट’ (DSD) की श्रेणी में रखा जाता है।   AI...
यात्री से मारपीट करने वाला पायलट गिरफ्तार, एयरलाइन ने पहले ही किया था ऑफ ड्यूटी
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यात्री से मारपीट करने वाला पायलट गिरफ्तार, एयरलाइन ने पहले ही किया था ऑफ ड्यूटी

    दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर एक हवाई यात्री से मारपीट के मामले में एयरपोर्ट पुलिस ने आरोपी पायलट कैप्टन वीरेंद्र सेजवाल को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि पायलट ने एक यात्री को उसकी सात वर्षीय बेटी के सामने पीटा, जिससे यात्री की नाक की हड्डी टूट गई। हालांकि मामला जमानती धाराओं के तहत होने के कारण कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को थाने से ही जमानत दे दी गई।   पुलिस के अनुसार, पीड़ित यात्री अंकित दीवान की लिखित शिकायत पर एयरपोर्ट थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115, 126 और 351 के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में बताया गया कि आरोपी एयर इंडिया एक्सप्रेस का ऑफ-ड्यूटी पायलट था और उसी ने कथित तौर पर यह हमला किया।   घटना के बाद पीड़ित ने अपनी चोटों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर दिल्ली एयरपोर्ट लिमिटेड और एय...