बहस और असहमति स्वस्थ लोकतंत्र का हिस्सा: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने JNU में दी अहम सीख
नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के नौवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वाद-विवाद, चर्चा, असहमति और यहां तक कि टकराव भी एक स्वस्थ लोकतंत्र के आवश्यक तत्व हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी प्रक्रियाओं का अंततः निष्कर्ष पर पहुंचना और उसके कार्यान्वयन में सहयोग करना जरूरी है।
जेएनयू में उपराष्ट्रपति की प्रमुख बातें
राधाकृष्णन ने स्नातक छात्रों से अपने ज्ञान और कौशल को राष्ट्र सेवा में समर्पित करने का आग्रह किया।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उपदेशों को याद करते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि चरित्र निर्माण, बौद्धिक क्षमता और व्यक्तियों के सशक्तिकरण पर भी जोर देना चाहिए।
उपनिषदों, भगवद् गीता, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और तिरुवल्लुवर के तिरुक्कुरल का उदाहरण देते हुए राधाकृष्णन ने क...










