Thursday, July 23

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70 करोड़ रुपये के मेफेड्रोन ड्रग तस्करी एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

इंदौर और मंदसौर में तलाशी अभियान के दौरान मिले महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं डिजिटल साक्ष्य

इंदौर, 23 जुलाई 2026। (सद्वार्ता)
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने लगभग 70 करोड़ रुपये मूल्य के मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग तस्करी एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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गिरफ्तार आरोपियों में वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल एवं अक्षय अग्रवाल शामिल हैं। ईडी ने इन्हें 21 जुलाई 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही जांच के दौरान गिरफ्तार किया।

यह जांच अपराध शाखा इंदौर द्वारा नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। मामला लगभग 70 किलोग्राम मेफेड्रोन (एमडी) की अवैध तस्करी और कब्जे से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 70 करोड़ रुपये बताई गई है।

अवैध कमाई को छिपाने के लिए किए गए वित्तीय लेनदेन

ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मादक पदार्थों की अवैध तस्करी से अर्जित धन को विभिन्न व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक बैंक खातों के माध्यम से संचालित किया।

जांच के दौरान बड़े पैमाने पर नकद लेनदेन, धन के हस्तांतरण, लेयरिंग तथा अपराध से अर्जित आय को छिपाने के प्रयासों के संकेत मिले हैं।

दर्ज बयानों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपियों की नियमित व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ मादक पदार्थों की आपूर्ति एवं तस्करी से जुड़े होने की जांच की जा रही है।

इंदौर और मंदसौर में चलाया गया तलाशी अभियान

ईडी ने 17 जुलाई 2026 को इंदौर एवं मंदसौर स्थित कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान आरोपियों से संबंधित संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल उपकरण एवं अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए।

मामले में आगे की जांच जारी है।

अवैध वित्तीय नेटवर्क को खत्म करना लक्ष्य

ईडी ने कहा कि नशा मुक्त भारत का लक्ष्य केवल मादक पदार्थों की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे काम करने वाले वित्तीय नेटवर्क को समाप्त करना भी आवश्यक है।

धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत एजेंसी मादक पदार्थों की तस्करी से अर्जित अपराध की आय की पहचान, जांच एवं जब्ती की कार्रवाई कर रही है।

एजेंसी ने युवाओं को नशे के खतरे से बचाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों एवं आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया है।

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