डिग्री नहीं, अब स्किल की दौड़: 1990 की तरह भारत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर
नई दिल्ली। आज की दुनिया में कंपनियों को डिग्री से ज्यादा स्किल की जरूरत है। डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में काम करने के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। मशीनें रोजमर्रा के कई काम कर रही हैं, और इंसानों से उम्मीद है कि वे रचनात्मक सोचें, तेजी से सीखें और नई परिस्थितियों में खुद को ढाल सकें।
90 के दशक की सीख:1990 के दशक में कंप्यूटर क्रांति ने भारत के शिक्षा और रोजगार पर गहरा असर डाला। उस समय कॉलेजों में कंप्यूटर शिक्षा लगभग अनुपस्थित थी। तब NIIT और Aptech जैसे निजी संस्थानों ने युवाओं को कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग की बुनियादी स्किल सिखाकर लाखों को रोजगार के अवसर दिए। उस दौर ने यह साबित किया कि कभी-कभी हुनर डिग्री से बड़ा साबित होता है।
स्किल ही सब कुछ नहीं:हालांकि स्किल जरूरी है, लेकिन केवल यह ही पर्याप्त नहीं है। जिन लोगों के पास मजबूत शैक्षणिक नींव थी – यानी सोचन...










