कमजोर पैरों से बढ़ सकता है डिमेंशिया का खतरा, 40 की उम्र से अपनाएं ये आसान आदतें
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, पैरों की मसल्स कमजोर और पतली होने लगती हैं। इसे सार्कोपेनिया कहते हैं। यह उम्र बढ़ने के साथ सामान्य रूप से होता है, लेकिन अगर शरीर सक्रिय नहीं है, तो यह तेजी से बढ़ सकता है और दिमागी स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है।
पैरों की कमजोरी से ब्रेन पर खतरा
अध्ययनों से पता चला है कि कमजोर पैरों की वजह से कॉग्निटिव फंक्शन यानी सोचने और याद रखने की क्षमता में कमी जल्दी आ सकती है। इसके साथ डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ जाता है। कारण यह है कि पैरों की मसल्स सक्रिय होने पर एक खास केमिकल रिलीज होता है, जिसे ब्रेन डिराइव्ड न्यूरोट्रोफिक फैक्टर (BDNF) कहते हैं। यह केमिकल मस्तिष्क के मेमोरी एरिया यानी हिपोकैम्पस में कनेक्शन बढ़ाता है।
चोट का खतरा भी कम होता है
मजबूत पैरों से शरीर का बैलेंस सही रहता है, जिससे गिरने या चोट लगने का खतरा कम होता है। खासकर बुजुर्गों में यह अत्यंत ...










