Saturday, July 25

Tag: By Dr. Priyanka Saurabh

जब नारों में गालियाँ उतर आएँ
Opinion

जब नारों में गालियाँ उतर आएँ

लोकतंत्र की असली ताकत संवाद है, अपमान नहीं लेखिका : डॉ. प्रियंका सौरभ (सद्वार्ता) लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह असहमति को स्थान देता है। प्रश्न पूछना, सत्ता से जवाब मांगना और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाना एक जागरूक नागरिक का अधिकार ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला भी है। लेकिन जब विरोध की भाषा में विचारों की जगह गालियाँ और तर्कों की जगह अपमान आ जाता है, तब लोकतंत्र की मूल भावना आहत होने लगती है। नारे किसी भी आंदोलन की पहचान होते हैं। वे केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि उस आंदोलन के विचार, उद्देश्य और दिशा का प्रतीक होते हैं। इतिहास में "इंकलाब ज़िंदाबाद", "करो या मरो" और "जय जवान, जय किसान" जैसे नारे इसलिए अमर हुए क्योंकि उनमें किसी व्यक्ति के प्रति अपमान नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक संदेश था। आज सोशल मीडिया के दौर में तीखी और उत्तेजक भ...