आखिर क्यों बढ़ते जा रहे हैं एनकाउंटर, समझिए क्यों कई बार जरूरी हो जाता है अपराधियों को ढेर करना
नई दिल्ली।देशभर में लगातार बढ़ते पुलिस एनकाउंटर एक बार फिर बहस के केंद्र में हैं। कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम मानते हैं, तो कुछ इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हैं। मगर सवाल यही है कि आखिर क्यों पुलिस को अपराधियों पर गोली चलाने की नौबत आ जाती है?
दिल्ली पुलिस के इतिहास में दर्ज हैं कई विवादित एनकाउंटर
31 मार्च 1997 का दिन दिल्ली पुलिस के इतिहास में एक काले अध्याय की तरह याद किया जाता है। कनॉट प्लेस में क्राइम ब्रांच द्वारा किए गए एनकाउंटर में हरियाणा के दो कारोबारी प्रदीप गोयल और जगजीत सिंह मारे गए, जबकि तरुणप्रीत नामक व्यक्ति दिव्यांग हो गए। पुलिस ने इसे आत्मरक्षा बताया, लेकिन मामला बढ़ा और तत्कालीन पुलिस कमिश्नर निखिल कुमार को 24 घंटे के भीतर हटा दिया गया। बाद में एसीपी और इंस्पेक्टर समेत 10 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा हुई।
बटला हाउस मुठभेड़ — स...










