Monday, August 10

Editorial

बाइक टैक्सी चालकों की लापरवाही यात्रियों की जान पर भारी, सरकार लगाए करोड़ों के जुर्माने
Crime, Editorial

बाइक टैक्सी चालकों की लापरवाही यात्रियों की जान पर भारी, सरकार लगाए करोड़ों के जुर्माने

देश के छोटे-बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रही बाइक टैक्सी सेवाएं अब यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। रैपिडो, उबर और ओला जैसी बाइक टैक्सी कंपनियों के कई चालक कम समय में अधिक राइड पूरी करने की होड़ में यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। शहरों की सड़कों पर अक्सर देखा जा रहा है कि बाइक टैक्सी चालक रेड लाइट जंप करना, तेज गति से वाहन चलाना, रश ड्राइविंग करना और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना आम बात समझने लगे हैं। इसका सीधा खतरा पीछे बैठे यात्रियों की जान पर मंडरा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार देश में दोपहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो अपने आप में चिंता का विषय है। इसके बावजूद कई बाइक टैक्सी चालक स्वयं हेलमेट नहीं पहनते और न ही यात्रियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। कई मामलों में यात्रियों को बिन...
क्या राहुल गांधी विपक्ष के लिए ‘ग्रहण’ बन गए हैं?
Editorial

क्या राहुल गांधी विपक्ष के लिए ‘ग्रहण’ बन गए हैं?

कांग्रेस और पूरा विपक्ष वेंटिलेटर पर—क्यों हर चुनाव में डूबती जाती है विपक्ष की नैया? भारतीय राजनीति में राहुल गांधी की भूमिका जितनी विवादित है, उतनी ही रहस्यमयी भी। कई बार ऐसा लगता है कि जिस भी राजनीतिक मंच पर राहुल गांधी कदम रखते हैं, वहाँ विपक्ष पर मानो कोई अदृश्य ग्रहण लग जाता है। यह सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि पिछले दस वर्षों का चुनावी इतिहास इस धारणा को और प्रबल करता है। ऐसा क्यों है कि राहुल गांधी चुनाव लड़ते तो विपक्ष के नाम पर हैं, लेकिन जीत का वास्तविक श्रेय—बार-बार भाजपा और एनडीए को ही मिलता है?क्या यह सिर्फ राजनीतिक संयोग है?या वास्तव में विपक्ष का नेतृत्व “परिवारवाद की बेड़ियों” में बुरी तरह जकड़ चुका है? 2014: कहानी की शुरुआत — कांग्रेस का ऐतिहासिक पतन 2014 में कांग्रेस सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गई। यह सिर्फ एक हार नहीं थी, बल्कि विपक्ष के राजनीतिक अस्तित्व पर गंभीर प्रहा...