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मानसिक शांति के लिए किताबें पढना है उपयोगी – डाॅ वीरेन्द्र भाटी मंगल

मानसिक शांति के लिए किताबें पढना है उपयोगी – डाॅ वीरेन्द्र भाटी मंगल

एक समय था जब किताबे पढ़ना व्यक्ति की अभिरुचि शामिल हुआ करता था। प्रायः लोग अपनी रुचि के अनुसार कविता, कहानी, एकांकी, उपन्यास, नाटक, निबन्ध आदि विभिन्न विधाओं की पुस्तकें पढ़ते थे। लेकिन आज सोशल मीडिया एवं इंटरनेट के युग में किताबें पढने की संस्कृति लुप्त होती जा रही है। वर्तमान दौर इन्टरनेट का है। जब सारी सामग्री इन्टरनेट पर उपलब्ध है तो कौन किताबें खरीदे और क्यों पढ़े? हमारी नई पीढ़ी तो किताबों से बहुत दूर होती जा रही है। सही मायने में यह बढते इंटरनेट दौर में विचारणीय प्रश्न भी है।

सही मायने में एक व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा दोस्त किताब ही होती है। किताबें ही हमें बिना कुछ कहे या पूछें हमें ज्ञान और शांति प्रदान करती है। किताबों के माध्यम से ही हमें देश व दुनिया को जानने का मौका मिलता है। अगर इस दौर में आपका कोई मित्र नहीं है तो आपको किताबों से मित्रता कर लेनी चाहिए, यह ज्ञान बढाने के साथ-साथ हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। हालांकि इस डिजिटल दौर में लोग किताबों को भी डिजिटल रूप में ही पढ़ना पसंद करते हैं, लेकिन फिर भी कोशिश करें कि किताबें, पत्र-पत्रिकायें ये सब हार्ड काॅफी में पढे तो कुछ ही दिनों में आपको अपने भीतर अनेक बदलाव देखने को मिलेगें। विशेषज्ञ की सलाह भी यही है कि रात को कुछ समय किताबें पढ़ना हमारे स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उपयोगी है।

पिछले दिनों हुए एक शोध में सामने आया कि प्रतिदिन आधा घण्टा किताब पढ़ने से, जो पढ़ते नहीं हैं उन लोगों के मुकाबले उन्हें करीब दो वर्ष तक लम्बा जीवन जीने में मदद मिलती है। येल यूनिवर्सिटी की शोध में हुए निष्कर्ष को डॉ. माइकल मोस्ले ने, पिछले दिनों प्रकाशित आसान जीवन जीने की कला नामक किताब में भी किया है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जेन आस्टेन ने अपने अध्ययन में पाया कि पढ़ने के दौरान पूरे ब्रेन में रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है। यह इसलिए होता है कि जब हम किसी अच्छी किताब को पढ़ने में मग्न जाते हैं तो ब्रेन सेन्टेन्स के साउण्ड, स्मेल टेस्ट के बारे में कल्पना करने लगता है। इससे हमारे दिमाग के अलग-अलग हिस्से सक्रिय होने लगते हैं। उदाहरण के तौर पर लैवेंडर, दालचीनी, साबुन जैसे शब्द न केवल हमारे दिमाग में लैंग्वेज प्रोसेसिंग करते हैं, बल्कि इन शब्दों को पढ़ने से ही इनकी महक याद आ जाती है। यार्क यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट रेमण्ड मार का कहना है कि फिक्शन पढ़ने से हमारे अन्दर अन्य लोगों के लिए सहानुभूति का भाव आने लगता है। वहीं इससे जीवन में कौशल का भी विकास भी होता है।

शोध अध्ययनों से यह भी सामने आया है कि पढ़ने से आधुनिक जीवन शैली के दुष्प्रभाव से बचने में भी मदद मिलती है। वास्तव में पढ़ने के दौरान शब्दों पर हमारा ध्यान केन्द्रित हो जाता है और तनाव कम होने लगता है। इससे याद्दाश्त बेहतर होने लगती है और अवसाद से बचने में मदद मिलती है। किताबें पढ़ना एक अच्छी आदत है। अच्छी और प्रेरक पुस्तकें पढ़ने से न केवल ज्ञानार्जन होता है, अपितु अच्छे संस्कार भी पनपते हैं। पुस्तकें पढ़ने से यादाश्त शक्ति में चमत्कारिक रूप से प्रभाव पडता है। इससे घटनाओं को याद रखने में भी हमें मदद मिलती है।

किताबें रोज पढने से उनकी सामग्री याद हो जाती है क्योंकि जब हम किसी किताब को पढ़ते हैं तो उसमें खो जाते हैं, इससे हमारी एकाग्रता बढ़ती है। किताबे पढ़ने से हमारा शब्द कोश भी बढ़ता है। किताबों में नए-नए शब्दों का प्रयोग होता है। किताबें मनुष्य की दिमागी खुराक जैसी होती है, इससे मस्तिष्क की दिमागी क्षमता भी बढ़ती है। इससे व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ और प्रसन्न रहता है। किताबें पढने से व्यक्ति कल्पनाशील बन जाता है। इन्हें पढ़ने से विचारों में परिपक्वता आने के साथ ही व्यक्ति में बुद्धि और ज्ञान का विकास भी होने सकता है। किताबें नियमित पढने से मस्तिष्क ठीक से काम करता है, यह मस्तिष्क के लिए योगा और एक्सरसाइज है। इससे डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसे रोगों को रोकने मे भी मदद मिलती है। अच्छी किताबें, अच्छी स्टोरी पढ़ना मस्तिष्क के लिए संतुलित आहार की तरह होता है। इससे जीवन में सकारात्मता का विकास होता है। इससे व्यक्ति संघर्ष और चुनौतियों को सकारात्मक रूप से सामना करना सीख जाता है। किताबें पढने से जीवन में रचनात्मकता का विकास होने के साथ संवेदना का भी विकास होता है। किताबें पढने से नींद भी अच्छी आती है। निरन्तर किताबे पढ़ने से व्यक्ति के जीवन से 68 प्रतिशत तक मानसिक तनाव कम हो जाता है।
-लक्ष्मी विलास, लाडनूं
सम्पर्क-9413179329

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