

इंदौर। (सद्वार्ता) भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च शिक्षा को नई दिशा देने की पहल करते हुए प्रेस्टिज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (पीआईएमआर), डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी ने एआई-सक्षम ‘प्रेस्टिज कैपेबिलिटी डेवलपमेंट सेंटर (PCDC)’ की शुरुआत की है। यह पहल पारंपरिक परीक्षा-केंद्रित शिक्षा से आगे बढ़कर क्षमता-आधारित शिक्षण, शोध, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग को शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसका शुभारंभ दो दिवसीय ‘प्रेस्टिज एजुविज़न-2030 : एकेडमिक लीडरशिप एंड ट्रांसफॉर्मेशन कॉन्क्लेव-2026’ के दौरान किया गया।
यह सेंटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से विद्यार्थियों की बौद्धिक, नेतृत्व, उद्यमिता एवं व्यावसायिक क्षमताओं का सतत आकलन और विकास करेगा। व्यक्तिगत फीडबैक, चैलेंज-आधारित शिक्षण, अनुभवात्मक शिक्षा तथा निरंतर क्षमता मूल्यांकन के माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योग की बदलती आवश्यकताओं और भविष्य के कार्यस्थलों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। यह पहल विश्वविद्यालय के विजन-2030 का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।
कॉन्क्लेव का शुभारंभ करते हुए पीआईएमआर डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. डेविश जैन ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे केवल अध्यापक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, नवप्रवर्तक और संस्थान के ब्रांड एम्बेसडर की भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शैक्षणिक प्रयास का केंद्र विद्यार्थियों का समग्र व्यक्तित्व विकास और करियर निर्माण होना चाहिए। उन्होंने अंतरविषयक शोध, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, उद्योग-अकादमिक साझेदारी तथा शिक्षण, शोध और प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग पर विशेष बल दिया।
एआईसी प्रेस्टिज इंस्पायर फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. संजीव पाटनी ने कहा कि प्रेस्टिज कैपेबिलिटी डेवलपमेंट सेंटर ऐसा एआई-सक्षम शिक्षण वातावरण विकसित करेगा, जो शिक्षा को उद्योग की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह सेंटर क्षमता-आधारित शिक्षण, सतत मूल्यांकन और व्यावहारिक सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देगा तथा विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बनाएगा।
विश्वप्रसिद्धएआई विशेषज्ञ डॉ. सत्यम प्रियदर्शी ने अपने मुख्य व्याख्यान में पारंपरिक एआई से जनरेटिवएआई और अब एजेंटिकएआई तक की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए बताया कि बुद्धिमान प्रणालियां स्वायत्त निर्णय क्षमता, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और वर्कफ़्लो ऑटोमेशन के माध्यम से उद्योगों में व्यापक बदलाव ला रही हैं। उन्होंने कहा कि यही तकनीक व्यक्तिगत शिक्षण, शोध की गुणवत्ता में सुधार और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पीआईएमआर के कुलपति डॉ. एस. एस. भाकर ने विश्वविद्यालय का शैक्षणिक रोडमैप प्रस्तुत करते हुए शोध उत्कृष्टता, नैतिक एआई, नवाचार, अंतरविषयक शिक्षण तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को शिक्षा 5.0 और आउटकम बेस्ड एजुकेशन की आधारशिला बताया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शोध, कंसल्टेंसी, पेटेंट, डेटा गवर्नेंस और एआई एथिक्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रेस्टिज एजुकेशन फाउंडेशन के निदेशक डॉ. हिमांशु जैन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा के स्वरूप को बदल सकती है, लेकिन वह शिक्षकों के मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और विद्यार्थी-शिक्षक संबंधों का स्थान कभी नहीं ले सकती। उन्होंने शिक्षकों से आजीवन सीखने की प्रवृत्ति अपनाने तथा विद्यार्थियों के साथ प्रेरणादायी, विश्वासपूर्ण और मूल्य-आधारित संबंध विकसित करने का आह्वान किया।
कॉन्क्लेव में संस्थागत ब्रांडिंग, शोध उत्कृष्टता, स्नातक शिक्षा में गुणवत्ता सुधार, विधि शिक्षा, छात्र मार्गदर्शन तथा ‘विकसित भारत के लिए संस्थानों का निर्माण’ जैसे विषयों पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान प्रेस्टीज एजुकेशन फाउंडेशन के डायरेक्टर केतन जैन, पूर्व यूजीसी सचिव डॉ. रजनीश जैन, एआई उद्यमी अखिलेश गांधी (संस्थापक, MoreYeahs, अमेरिका), डॉ. मनीष दवे (शिव नादर विश्वविद्यालय), प्रो. मिलिंद पडालकर, डॉ. अनिल बाजपेयी, डॉ. एस. रमन अय्यर तथा डॉ. दीपक जारोलिया सहित शिक्षा एवं उद्योग जगत के अनेक विशेषज्ञों ने भविष्य की शिक्षा, नवाचार, उद्योग-अकादमिक सहयोग और संस्थागत परिवर्तन पर अपने विचार साझा किए।
समापन सत्र में डॉ. डेविश जैन ने विश्वविद्यालय की सभी शैक्षणिक इकाइयों से शोध, प्रवेश, प्लेसमेंट, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, वैश्विक सहयोग और संस्थागत उत्कृष्टता के लिए स्पष्ट, समयबद्ध और मापनीय कार्ययोजनाएं तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विजन-2030 का उद्देश्य केवल लक्ष्य निर्धारित करना नहीं, बल्कि उन्हें ठोस परिणामों में बदलना है, ताकि पीआईएमआर भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप एक शोध-प्रधान, नवाचार-केंद्रित और एआई-सक्षम वैश्विक शिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित हो सके।



