Saturday, July 25

This slideshow requires JavaScript.

व्यापार समझौतों में अब जलवायु परिवर्तन भी बना अहम एजेंडा, वैश्विक स्तर पर बदल रही आर्थिक रणनीति

नई दिल्ली। (सद्वार्ता) दुनिया में जलवायु परिवर्तन अब केवल संयुक्त राष्ट्र या COP सम्मेलनों तक सीमित विषय नहीं रह गया है। अब इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार और आर्थिक सहयोग समझौतों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। देशों के बीच होने वाले नए व्यापार समझौते अब केवल टैरिफ कम करने और व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, हरित उद्योग, महत्वपूर्ण खनिजों और जलवायु सहयोग को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

This slideshow requires JavaScript.

इसी बदलते वैश्विक रुझान को समझने के लिए International Institute for Sustainable Development (IISD) ने Trade & Climate Tracker नामक दुनिया का पहला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह मंच 1 जनवरी 2025 के बाद हुए 71 अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग समझौतों का विश्लेषण करता है और बताता है कि इनमें जलवायु परिवर्तन तथा स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े प्रावधान किस प्रकार शामिल किए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध 46 समझौतों के अध्ययन में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। लगभग 67 प्रतिशत समझौतों में ऊर्जा सहयोग, 59 प्रतिशत में जलवायु परिवर्तन, 54 प्रतिशत में महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Raw Materials) तथा 37 प्रतिशत में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) से जुड़े विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के लिए आवश्यक संसाधनों की सुरक्षित आपूर्ति, कार्बन उत्सर्जन में कमी और हरित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक व्यापार समझौते अब केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के प्रमुख साधन भी बनेंगे। विभिन्न क्षेत्रों के देश अब व्यापारिक साझेदारी के माध्यम से जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

भारत के लिए भी यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत वर्तमान में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन सहित कई देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है। साथ ही देश ग्रीन हाइड्रोजन, सौर एवं पवन ऊर्जा, बैटरी निर्माण और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में व्यापार समझौते केवल निर्यात और आयात तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा बाजार और हरित उद्योगों में भारत की भूमिका कितनी मजबूत होगी।

यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में व्यापार और जलवायु परिवर्तन एक-दूसरे के पूरक बनते जा रहे हैं। अब देशों की आर्थिक साझेदारियां केवल बाजार तक पहुंच नहीं, बल्कि हरित विकास, स्वच्छ ऊर्जा और सतत भविष्य की दिशा भी तय करेंगी।

Leave a Reply