Thursday, July 23

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AI Impact Summit 2026: दुनिया के बड़े CEO की भारत में रहीं लाइन, 3 कारण समझें
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AI Impact Summit 2026: दुनिया के बड़े CEO की भारत में रहीं लाइन, 3 कारण समझें

नई दिल्ली: अगले हफ्ते यानी 16 फरवरी से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में India AI Impact Summit 2026 का आयोजन होने जा रहा है। इस समिट में दुनियाभर के दिग्गज CEOs और सरकारों के प्रमुख हिस्सा लेने वाले हैं। गूगल के सुंदर पिचाई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, एनवीडिया के जेन्सन हुआंग समेत एंथ्रोपिक, डीपमाइंड और माइक्रोसॉफ्ट के शीर्ष अधिकारियों की भी मौजूदगी होगी। क्यों भारत में है इतनी दिलचस्पी? इसका मुख्य कारण तीन प्रमुख बिंदु हैं: 1. भारत की बड़ी और डिजिटल आबादीभारत में इंटरनेट से जुड़े लोगों की संख्या बड़ी है और वे एआई तकनीक का इस्तेमाल करने में पीछे नहीं हैं। दुनिया में डेटा की खपत का लगभग 20 प्रतिशत भारत उत्पन्न करता है। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। 2. एआई में भारत का भविष्यजैसे भारत ने आईटी क्षेत्र में अपनी ताकत दिखा कर दुनिया की कंपनियों को सेवाएँ दीं, वैसा ही अब एआई के क्षेत्र में भी हो सकता है। ...
भुवनेश्वर में साइबर फ्रॉड का नया मामला: बुजुर्ग कपल पर डिजिटल अरेस्ट का डर, 1 करोड़ की मांग से बचे
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भुवनेश्वर में साइबर फ्रॉड का नया मामला: बुजुर्ग कपल पर डिजिटल अरेस्ट का डर, 1 करोड़ की मांग से बचे

भुवनेश्वर (ओडिशा): नयापल्ली इलाके में एक रिटायर्ड सीनियर NALCO ऑफिसर और उनकी पत्नी साइबर अपराधियों के जाल में फंसते-फंसते बाल-बाल बचे। अपराधियों ने उन्हें लगभग 35 घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और 1 करोड़ रुपये की मांग की। घटना के अनुसार, 9 फरवरी को कपल को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पटना का पुलिस अधिकारी बताया और आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड का आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग में गलत इस्तेमाल हो रहा है। स्कैमर्स ने उन्हें धमकी दी कि अगर तुरंत पैसे नहीं दिए गए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आरोपियों ने वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने अन्य लोगों को दिखाकर डर पैदा किया। कपल को घर से बाहर नहीं निकलने की चेतावनी दी गई और उन्हें बताया गया कि उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट पहले ही जारी हो चुका है। अपराधियों ने दावा किया कि उनके नाम पर जम्मू-कश्मीर में HDFC बैंक अकाउंट खुला है ...
दिल्ली-गुजरात की दूरी मिटाई, 1200 किमी दूर से 4 मरीजों का सफल ऑपरेशन
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दिल्ली-गुजरात की दूरी मिटाई, 1200 किमी दूर से 4 मरीजों का सफल ऑपरेशन

नई दिल्ली: टेक्नोलॉजी और मेडिकल की दुनिया में एक नया मील का पत्थर स्थापित हुआ है। दिल्ली में मौजूद गंगाराम अस्पताल के चार मरीजों की सर्जरी गुजरात के वापी शहर से ही पूरी हुई। 5G हाई-स्पीड इंटरनेट और टेली रोबोटिक तकनीक की मदद से सर्जन ने ऑपरेशन थियेटर में मौजूद हुए बिना ही मरीजों का सफल ऑपरेशन किया। टेली रोबोटिक सर्जरी: कैसे संभव हुआ कारनामा ऑपरेशन के दौरान सर्जन ने रोबोटिक सिस्टम के कंसोल पार्ट से मरीजों के शरीर में लगे इंस्ट्रूमेंट्स को नियंत्रित किया। इस प्रक्रिया में चार अलग-अलग सर्जनों ने चार मरीजों की अलग-अलग सर्जरी सफलतापूर्वक अंजाम दी। पहली सर्जरी: डॉक्टर विपीन त्यागी – किडनी की रूकावट दूसरी सर्जरी: डॉक्टर तरुण मित्तल – गॉल ब्लैडर तीसरी सर्जरी: डॉक्टर अनमोल आहूजा – हर्निया चौथी सर्जरी: डॉक्टर मुकुंद खेतान – गॉल ब्लैडर डॉक्टर विपीन त्यागी ने बताया कि यह प...
ब्रैड पिट और टॉम क्रूज की फाइट भी अब असली-नकली में नहीं कर पाएगा फर्क, Bytedance का नया AI मॉडल Seedance 2.0
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ब्रैड पिट और टॉम क्रूज की फाइट भी अब असली-नकली में नहीं कर पाएगा फर्क, Bytedance का नया AI मॉडल Seedance 2.0

बीजिंग: सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट की दुनिया में असली और नकली का फर्क मिटाने वाला नया AI मॉडल अब सामने आ गया है। TikTok की पैरेंट कंपनी ByteDance ने अपना नया वीडियो जेनरेशन मॉडल Seedance 2.0 पेश किया है, जो टेक्स्ट, इमेज और ऑडियो को मिलाकर प्रोफेशनल फिल्म, विज्ञापन और ई-कॉमर्स कंटेंट बनाने में सक्षम है। Seedance 2.0: AI का नया आयाम इस मॉडल की खासियत यह है कि यह कुछ ही प्रॉम्प्ट में सिनेमैटिक स्टोरीलाइन और हाई-क्वालिटी वीडियो तैयार कर देता है। सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें ब्रैड पिट और टॉम क्रूज की फाइट भी शामिल है। वीडियो में एपस्टीन फाइलों के इर्द-गिर्द डायलॉग चलते हैं, लेकिन देखने वालों को यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि वीडियो असली है या AI द्वारा बनाया गया। वीडियो में असली और नकली का फर्क नामुमकिन डिजिटल फिल्म डायरेक्टर लू हुआंग ने कहा, "मैंने सात साल ...
2026 में भी घर में लैंडलाइन क्यों जरूरी? स्मार्टफोन के दौर में ये 4 बड़े फायदे
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2026 में भी घर में लैंडलाइन क्यों जरूरी? स्मार्टफोन के दौर में ये 4 बड़े फायदे

नई दिल्ली: आज के मोबाइल युग में अधिकतर लोग सिर्फ मोबाइल फोन पर ही निर्भर हैं। कई घरों में लैंडलाइन फोन अब कहीं नजर नहीं आते। लोगों को लगता है कि अब लैंडलाइन की जरूरत नहीं है, लेकिन ऐसा सोचना बड़ी गलती हो सकती है। लैंडलाइन केवल एक पुराना डिवाइस नहीं, बल्कि आपातकालीन स्थिति में एक जीवनरक्षक उपकरण है। 1. बिना बिजली के भी काम करता है मोबाइल फोन बिजली जाने पर तुरंत डिस्चार्ज हो जाते हैं। जबकि लैंडलाइन फोन बिजली जाने के बावजूद काम करता है क्योंकि इसे सीधे फोन लाइन से बिजली मिलती है। इस वजह से आंधी-तूफान या अन्य इमरजेंसी में लैंडलाइन फोन एक भरोसेमंद साधन साबित होता है। 2. कॉल ड्रॉप की समस्या नहीं मोबाइल की तुलना में, लैंडलाइन में कॉल ड्रॉप की संभावना बेहद कम होती है। इसकी साउंड क्वालिटी भी बेहतर होती है और उम्रदराज लोगों के लिए इसे चलाना आसान होता है। 3. पैसों की बचत अगर घर में चार लोग हैं ...
स्मार्टफोन में सालों पुराना सिम? बदलने पर मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे
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स्मार्टफोन में सालों पुराना सिम? बदलने पर मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

नई दिल्ली: कई लोग यह नहीं जानते कि उनके पुराने सिम कार्ड की वजह से उनके स्मार्टफोन में हीटिंग, बैटरी ड्रेन और नेटवर्क समस्याएँ हो सकती हैं। सालों-साल एक ही सिम इस्तेमाल करने की बजाय समय-समय पर सिम अपग्रेड कराना न केवल फोन के प्रदर्शन के लिए जरूरी है, बल्कि यह सुरक्षा और इंटरनेट एक्सपीरियंस को भी बेहतर बनाता है। 1. तेज इंटरनेट स्पीड पुराने सिम कार्ड नई नेटवर्क टेक्नोलॉजी को पूरी तरह सपोर्ट नहीं करते। इसके कारण कई बार यूजर्स को स्लो इंटरनेट स्पीड का सामना करना पड़ता है। सिम अपग्रेड करने पर आप तेज और स्थिर इंटरनेट का लाभ उठा सकते हैं। 2. स्मूद कॉलिंग एक्सपीरियंस अगर कॉल बार-बार ड्रॉप हो रही है, तो अक्सर इसका कारण पुराना सिम कार्ड होता है। टेलीकॉम कंपनियां अपने नेटवर्क को अपग्रेड करती हैं और नए सिम उसी के अनुरूप बनाए जाते हैं। अपग्रेडेड सिम कॉल ड्रॉप की समस्या को कम करता है। 3. सिम हैकिंग...
10 साल की उम्र में खरीदा था AI.com, 634 करोड़ में बेचकर लगी बड़ी ‘लॉटरी’
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10 साल की उम्र में खरीदा था AI.com, 634 करोड़ में बेचकर लगी बड़ी ‘लॉटरी’

कुआलालंपुर/नई दिल्ली: इंटरनेट की दुनिया में कभी-कभी साधारण निवेश असाधारण सफलता में बदल जाता है। ऐसा ही हुआ मलयेशिया के टेक आंत्रप्रेन्योर अर्सियान इस्माइल के साथ। उन्होंने मात्र 10 साल की उम्र में, साल 1993 में, AI.com डोमेन को लगभग 300 रुपये में खरीदा था। अब यह डोमेन 70 मिलियन डॉलर (लगभग 634 करोड़ रुपये) में बिक गया है। इस डोमेन को खरीदा था क्यों?अर्सियान ने AI.com इसलिए खरीदा क्योंकि AI उनके नाम Arsyan Ismail के पहले अक्षरों से मेल खाता था। उस समय यह एक दुर्लभ और क्लीन वेब एड्रेस था। हालांकि, AI टेक्नोलॉजी की दुनिया में क्रांति लाने के बाद यह डोमेन निवेश उनके जीवन का स्मार्ट और अहम फैसला साबित हुआ। अब तक की सबसे महंगी डोमेन डील अप्रैल 2025 में अर्सियान ने AI.com को Crypto.com के CEO क्रिस मार्सजेलक को बेचा। यह डील पूरी तरह क्रिप्टोकरेंसी में हुई और इसे अब तक की सबसे महंगी पब्लिकली रिप...
नकली 4K टीवी से बचें! केवल रेज़ॉल्यूशन देखना पड़ सकता है महंगा
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नकली 4K टीवी से बचें! केवल रेज़ॉल्यूशन देखना पड़ सकता है महंगा

नई दिल्ली: स्मार्ट टीवी खरीदते समय केवल डिस्प्ले रेज़ॉल्यूशन पर ध्यान देना एक बड़ी भूल हो सकती है। ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार में आजकल 20,000 रुपये से कम में 4K टीवी मिल रहे हैं, लेकिन इनमें अक्सर ‘नकली 4K’ होने का खतरा रहता है। फीचर्स और ऑफर्स के चकाचौंध में ग्राहक सही निर्णय नहीं ले पाते और असली 4K अनुभव से वंचित रह जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 4K का मतलब केवल पिक्सल काउंट नहीं होता। असली 4K टीवी में रिफ्रेश रेट और MEMC (मोशन एस्टिमेशन, मोशन कंपेंसेशन) जैसी तकनीकें भी शामिल होती हैं, जो विज़ुअल्स को स्मूद और ज्वलंत बनाती हैं। सस्ते 4K टीवी में क्या दिक्कतें आती हैं? सस्ते टीवी में पिक्सल उच्च होने के बावजूद कलर्स फीके और मूवमेंट धुंधली लग सकती है। दौड़ते हुए सीन या खेल के लाइव एक्शन में फ्रेम जर्क जैसा अनुभव हो सकता है। केवल रेज़ॉल्यूशन देखकर खरीदी गई टीवी गेमिंग और फिल्मों में असली मज...
37 साल की महिला सिखा रही एंथ्रोपिक के AI को ‘सही’ और ‘गलत’ की पहचान
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37 साल की महिला सिखा रही एंथ्रोपिक के AI को ‘सही’ और ‘गलत’ की पहचान

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से इंसान जैसी समझ विकसित कर रहा है, लेकिन इसे सही दिशा में मार्गदर्शन देने के लिए इंसानी बुद्धि की जरूरत अब भी अहम है। इसी जिम्मेदारी के तहत एंथ्रोपिक ने अपनी AI चैटबॉट Claude को नैतिक और सुरक्षित बनाना सौंपी है। इस कार्य के लिए कंपनी ने 37 साल की फ‍िलॉसफर अमांडा एस्‍केल को जिम्मेदारी दी है। अमांडा एस्‍केल, स्कॉटलैंड के एक गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने ऑक्‍सफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की है। एंथ्रोपिक से पहले वह ओपनएआई के साथ जुड़ी थीं, जहां उन्होंने AI सुरक्षा और नीति निर्माण पर काम किया। अब उनका मुख्य कार्य Claude को यह सिखाना है कि कौन-से उत्तर सही हैं, कौन-से गलत, और चैटबॉट को सुरक्षित तरीके से यूजर्स की मदद करने लायक बनाना। अमांडा का मानना है कि AI चैटबॉट्स इंसानी तत्व को समझते हुए धीरे-धीरे...
चीनी डेवलपर का कमाल: अलीबाबा ने पेश किया AI मॉडल RynnBrain, रोबोट्स को मिलेगा अपना ‘दिमाग’
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चीनी डेवलपर का कमाल: अलीबाबा ने पेश किया AI मॉडल RynnBrain, रोबोट्स को मिलेगा अपना ‘दिमाग’

बीजिंग/नई दिल्ली: चीनी टेक्नोलॉजी दिग्गज अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग ने रोबोटिक्स और एम्बोडाइड इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाई है। कंपनी के रिसर्च संस्थान डैमो एकेडमी ने हाल ही में ‘RynnBrain’ नामक नया ओपन-सोर्स एम्बोडाइड इंटेलिजेंस मॉडल पेश किया है। यह मॉडल Qwen3-VL पर आधारित है और इसे विशेष रूप से रोबोट्स को भौतिक दुनिया में समझने, तर्क करने और जटिल कार्यों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। RynnBrain को बाकी मॉडल्स से अलग बनाती है इसकी स्पेशल रीजनिंग क्षमता, जो रोबोट्स को केवल प्रोग्राम किए गए रूटीन पर निर्भर रहने से बाहर निकालकर उन्हें “दिमाग से सोचने” लायक बनाती है। इसका मतलब है कि रोबोट अब अपने निर्णय स्वयं ले पाएंगे और वास्तविक दुनिया की जटिल परिस्थितियों में काम कर सकेंगे। अलीबाबा का कहना है कि RynnBrain केवल ऑब्जर्वेशन तक सीमित नहीं है। यह फिजिकल वातावरण में स्थिति क...