Tuesday, July 21

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जागरूकता रथ बना शोपीस, डेंगू-मलेरिया से बचाव का संदेश नहीं पहुंच रहा शहर तक

कलेक्टर की पहल से तैयार प्रचार वाहन नगर पालिका परिसर में खड़ा, बारिश के मौसम में ठप पड़ा जनजागरूकता अभियान

विदिशा, शोभित जैन (सद्वार्ता)।

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बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच जनजागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया प्रचार-प्रसार वाहन इन दिनों अपनी उपयोगिता साबित करने के बजाय नगर पालिका परिषद परिसर में खड़ा-खड़ा धूल फांक रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर तैयार इस विशेष जागरूकता रथ का उद्देश्य शहर के विभिन्न वार्डों और सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचकर नागरिकों को मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करना था, लेकिन फिलहाल यह अभियान शुरू होने से पहले ही ठंडे बस्ते में नजर आ रहा है।

प्रचार वाहन पर “जन-जन का हो यही नारा, डेंगू मुक्त हो शहर हमारा” जैसे आकर्षक स्लोगन के साथ डेंगू, मलेरिया एवं चिकनगुनिया से बचाव संबंधी महत्वपूर्ण संदेश अंकित किए गए हैं। इसके माध्यम से लोगों को घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, नियमित साफ-सफाई रखने, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया जाना था।

बारिश के मौसम में सबसे अधिक जरूरत जागरूकता की

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वर्षा ऋतु में जलभराव और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। ऐसे समय व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सतर्क करना अत्यंत आवश्यक होता है। यदि प्रचार वाहन नियमित रूप से शहर के वार्डों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भ्रमण करे तो बड़ी संख्या में नागरिकों तक बचाव संबंधी संदेश प्रभावी ढंग से पहुंच सकते हैं।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन द्वारा तैयार किया गया यह प्रचार वाहन तभी सार्थक होगा, जब इसका नियमित संचालन किया जाए। वर्तमान में वाहन का लंबे समय से नगर पालिका परिषद परिसर में खड़ा रहना अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन यदि जागरूकता अभियान ही धरातल पर नहीं पहुंचेगा तो मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

अब नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन शीघ्र ही इस प्रचार वाहन को शहर की सड़कों पर उतारकर जनजागरूकता अभियान को गति देगा, ताकि डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

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