
— डॉ. विजय गर्ग

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार की ऑनलाइन तबादला नीति का उद्देश्य तबादलों में पारदर्शिता, समान अवसर, निष्पक्षता और प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करना है। ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने का मकसद मनमाने प्रशासनिक फैसलों और पक्षपात की संभावना को कम करते हुए पात्र कर्मचारियों को नियमों के तहत तबादला प्रक्रिया में भाग लेने तथा अपनी पसंद के स्टेशन चुनने का अवसर देना है। हालांकि, किसी भी नीति की सफलता उसके निर्माण से अधिक उसके निष्पक्ष और तार्किक क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।

इसी संदर्भ में वर्ष 2022 से 2026 के बीच नियुक्त कर्मचारियों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि इस अवधि में नियुक्त शिक्षकों को ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से भाग लेना पड़ रहा है, तो समान अवधि में नियुक्त अन्य विभागों के पात्र कर्मचारियों को इस प्रक्रिया से बाहर रखने का आधार क्या है? मांग किसी कर्मचारी को उसकी पसंद के स्थान पर तबादला देने की नहीं, बल्कि पात्र होने पर प्रक्रिया में शामिल होने, विकल्प देने और नियमों के अनुसार उसके मामले पर विचार करने के समान अवसर की है।
कट-ऑफ और नोशनल श्रेणी पर स्थिति स्पष्ट हो
इस मामले में 23 मई 2025 की कट-ऑफ तिथि, ‘नोशनल श्रेणी’ और 2026 की मॉडल ऑनलाइन तबादला नीति में उल्लेखित ‘प्रत्येक कैडर का पहला ऑनलाइन तबादला अभियान’ जैसे प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। इन नियमों को लागू करते समय संबंधित कैडर का वास्तविक प्रशासनिक और नीतिगत इतिहास भी देखा जाना चाहिए।
यदि किसी कैडर में वर्ष 2026 में पहली बार ऑनलाइन तबादला अभियान हो रहा है, तो उसकी स्थिति उस कैडर से अलग हो सकती है जिसमें वर्ष 2017 से ऑनलाइन तबादला अभियान आयोजित होते रहे हैं। ऐसे में सभी कैडरों पर एक ही कट-ऑफ को यांत्रिक तरीके से लागू करने से पहले उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझना जरूरी है।
पशुपालन विभाग का उदाहरण
समानता का सवाल केवल शिक्षकों और अन्य विभागों के बीच नहीं है। कुछ विभागों में ऑनलाइन तबादला नीति लागू होने और अभियान आयोजित होने के बावजूद कर्मचारियों को ऑफलाइन स्टेशन आवंटित किए जाने की स्थिति भी सवाल खड़े करती है।
हरियाणा के पशुपालन विभाग में वर्ष 2020 से वीएलडीए कैडर के लिए ऑनलाइन तबादला नीति लागू होने और इसके तहत दो ऑनलाइन तबादला अभियान आयोजित होने की बात सामने आती है। विभागीय जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद नियुक्त वीएलडीए कैडर के करीब 50 प्रतिशत कर्मचारियों को ऑफलाइन स्टेशन आवंटित किए गए। यदि यह जानकारी विभागीय रिकॉर्ड से पुष्ट होती है, तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ऑनलाइन नीति और अभियान मौजूद होने के बावजूद इतने बड़े स्तर पर ऑफलाइन स्टेशन आवंटित करने का आधार क्या था।
नियुक्ति पत्र की शर्त पर भी उठे सवाल
मामला उस समय और गंभीर हो जाता है, जब ऐसे कर्मचारियों के नियुक्ति पत्र अथवा स्टेशन आवंटन संबंधी दस्तावेजों में यह शर्त दर्ज हो कि उन्हें अगली ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से भाग लेना होगा।
यदि कर्मचारी ने सरकार की इसी शर्त को स्वीकार करते हुए ऑफलाइन स्टेशन पर कार्यभार संभाला और बाद में उसे अगली ऑनलाइन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, तो यह प्रशासनिक न्याय, नीतिगत निरंतरता और वैध अपेक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन जाता है।
पहले ऑनलाइन प्रक्रिया में भाग ले चुके कर्मचारियों की स्थिति
उन कर्मचारियों की स्थिति पर भी विचार जरूरी है, जो पहले आयोजित ऑनलाइन तबादला अभियानों में भाग ले चुके हैं। उन्होंने सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया, अपनी पसंद के विकल्प दिए और ऑनलाइन व्यवस्था का हिस्सा बने।
ऐसे में यदि वर्तमान अभियान में उनकी पात्रता या विकल्पों को सीमित किया जाता है, तो यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि पिछली ऑनलाइन भागीदारी का वर्तमान प्रक्रिया में क्या महत्व है।
तबादले का अधिकार और प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर अलग
यह समझना जरूरी है कि ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर और पसंद के स्टेशन पर तबादला पाने का अधिकार अलग-अलग बातें हैं।
किसी कर्मचारी को प्रक्रिया में शामिल कर उससे विकल्प लेना यह गारंटी नहीं है कि उसे उसकी पहली पसंद के स्थान पर ही नियुक्ति मिलेगी। अंतिम निर्णय रिक्तियों, पात्रता, कैडर की स्थिति, प्राथमिकता और प्रशासनिक आवश्यकता जैसे निर्धारित मानकों के आधार पर किया जा सकता है।
इसलिए पात्र कर्मचारियों को प्रक्रिया में शामिल करने से प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर नहीं होता, बल्कि पारदर्शिता और विश्वास मजबूत होता है।
सरकार को कैडरवार तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए
सरकार को इस पूरे मामले में कैडरवार स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। वर्ष 2017 से प्रत्येक कैडर में कितने ऑनलाइन तबादला अभियान आयोजित हुए, किन वर्षों में कर्मचारियों को भाग लेने का अवसर मिला, वर्ष 2022 से 2026 के बीच नियुक्त कर्मचारियों की स्थिति क्या रही, किन कर्मचारियों को ऑफलाइन स्टेशन दिए गए और किन नियुक्ति पत्रों में अगली ऑनलाइन प्रक्रिया में भागीदारी की शर्त थी—इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए।
इससे विवाद भावनात्मक आरोपों के बजाय तथ्यों के आधार पर सुलझाने में मदद मिलेगी।
नीति की एक समान व्याख्या जरूरी
23 मई 2025 की कट-ऑफ के साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि ‘प्रत्येक कैडर का पहला ऑनलाइन तबादला अभियान’ किसे माना जाएगा। जिन कैडरों में वर्ष 2017 से लगातार ऑनलाइन तबादला अभियान होते रहे हैं, उनकी स्थिति अलग तरीके से स्पष्ट की जानी चाहिए।
इसी तरह नोशनल श्रेणी का प्रभाव पुराने प्रतिभागियों तथा वर्ष 2022 से 2026 के बीच नियुक्त नए कर्मचारियों पर किस प्रकार पड़ेगा, इसकी भी स्पष्ट व्याख्या जरूरी है।
असली सवाल समान अवसर और नीतिगत निरंतरता का
यह विवाद केवल किसी एक कट-ऑफ तिथि या तकनीकी श्रेणी का नहीं है। इसका मूल प्रश्न समान अवसर, नीतिगत निरंतरता और प्रशासनिक न्याय से जुड़ा है।
यदि वर्ष 2022 से 2026 के बीच नियुक्त सभी शिक्षकों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, तो समान अवधि में नियुक्त अन्य विभागों के पात्र कर्मचारियों को इससे बाहर रखने का कारण भी स्पष्ट होना चाहिए।
इसी तरह यदि किसी कर्मचारी के नियुक्ति पत्र में अगली ऑनलाइन प्रक्रिया में भाग लेना अनिवार्य बताया गया था, तो बाद में उसे उसी प्रक्रिया से बाहर करने के फैसले पर भी पुनर्विचार आवश्यक है।
स्पष्ट और समयबद्ध नीति की जरूरत
ऑनलाइन तबादला नीति की विश्वसनीयता तभी कायम रह सकती है जब नियम विभाग, कर्मचारी या परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग दिखाई न दें। सरकार को पात्रता, कट-ऑफ, नोशनल श्रेणी, पूर्व ऑनलाइन भागीदारी, ऑफलाइन स्टेशन प्राप्त कर्मचारियों और 2022 से 2026 के बीच नियुक्त कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जहां आवश्यक हो, पुराने आदेशों और नियुक्ति पत्रों में दी गई शर्तों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। नियम स्पष्ट होने के बाद पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जानी चाहिए, ताकि कर्मचारी बार-बार बदलती तबादला प्रक्रिया और अनिश्चितता के बजाय अपने कार्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
अंततः एक अच्छी ऑनलाइन तबादला नीति वही होगी जो विवाद के बजाय समाधान, अनिश्चितता के बजाय विश्वास और असमानता के बजाय समान अवसर प्रदान करे। पात्र कर्मचारी को प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिले, उसकी पसंद पर निर्धारित नियमों के अनुसार विचार हो और प्रशासनिक आवश्यकता भी सुरक्षित रहे—इसी संतुलन से नीति वास्तव में पारदर्शी, समयबद्ध और न्यायपूर्ण बन सकेगी।
(सद्वार्ता)


