मुगलों का ‘इंटेलिजेंस एम्पायर’: जासूसों के दम पर चलता था साम्राज्य, हिंदू राजा भी रहते थे चौकन्ने
आशीष दीप, पटना: मुगलकालीन बादशाहों ने सिर्फ अपनी सेना और सत्ता से ही नहीं, बल्कि एक सटीक और चतुर खुफिया जाल के दम पर भारत पर राज किया। यह नेटवर्क इतना प्रभावशाली था कि राजस्थान के रजवाड़ों में होने वाली हर हलचल की जानकारी तत्काल बादशाह तक पहुंचती थी।
पांच परतों में बंटी मुगल जासूसी
मुगल खुफिया तंत्र कई परतों में बंटा हुआ था, जहां हर एजेंट का काम अलग और अत्यंत महत्वपूर्ण था।
वाकाई-नवीस (The Waqai Nawis) – खुले तौर पर काम करने वाले सरकारी रिपोर्टर, जो प्रशासनिक फैसलों और स्थानीय हालात की जानकारी बादशाह तक पहुंचाते थे। अकबर ने अपने दरबार में ऐसे 14 वाकाई-नवीस रखे थे।
सवानिह-नवीस (Swanih Nawis) – वाकाई-नवीस की रिपोर्टों की सत्यता जांचने वाले गुप्त एजेंट। शाहजहां ने इस पद की स्थापना की थी। इनके साथ घुड़सवार रहते थे और ये सीधे बादशाह...










