भिवानी से इंकार, चाहिए जिला हिसार
(सिवानी की दशक पुरानी न्यायसंगत मांग)
- डॉ. सत्यवान सौरभ
लोकतंत्र केवल मतदान की व्यवस्था का नाम नहीं है, बल्कि यह जनता की जरूरतों, सुविधाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप शासन चलाने की सतत प्रक्रिया भी है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक सीमाएँ स्थायी नहीं होतीं। समय, परिस्थितियों, जनसंख्या, विकास और जनसुविधा की आवश्यकताओं के अनुसार उनका पुनर्गठन किया जाता है। प्रशासनिक इकाइयों का निर्माण इसलिए किया जाता है ताकि नागरिकों को शासन और सरकारी सेवाओं तक आसान पहुँच मिल सके। यदि कोई प्रशासनिक व्यवस्था जनता के लिए सुविधा के बजाय असुविधा का कारण बनने लगे, तो उसके पुनर्विचार की आवश्यकता स्वाभाविक और न्यायसंगत हो जाती है। हरियाणा के सिवानी उपमंडल को जिला भिवानी से अलग कर जिला हिसार में शामिल करने की मांग इसी प्रकार की एक व्यावहारिक, तार्किक और जनहितकारी मांग है, जो पिछले लगभग दस वर्षों से लगाता...










