पिता सब्जी का ठेला लगाते थे… बार-बार फेल हुआ बेटा, लेकिन नहीं टूटा हौसला; छठे प्रयास में DSP बनकर रचा इतिहास
हर सफलता की कहानी मेहनत से शुरू होती है, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो संघर्ष, धैर्य और चुपचाप किए गए बलिदानों की मिसाल बन जाती हैं। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर, सरगुजा निवासी पंकज कुमार यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो बताती है कि हालात कितने ही कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।
पंकज के पिता सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का गुजारा करते थे। आर्थिक तंगी थी, साधन सीमित थे, लेकिन सपने बड़े थे। पिता ने बेटे को हालात से लड़ना और सपनों की इज्जत करना सिखाया। इसी सीख ने पंकज को बार-बार गिरने के बाद भी उठकर चलने की ताकत दी।
पढ़ाई पूरी की, फिर शुरू हुआ अफसर बनने का सफर
पंकज ने 2014 में 12वीं पास की। इसके बाद 2017 में कंप्यूटर साइंस से BSc और 2019 में गणित से MSc की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई खत्म होते ही उन्होंने CGPSC (छत्तीसगढ़ स्टेट पीसीएस) की तैयारी शुरू कर दी। लक्ष्य साफ...










