Tuesday, August 11

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78 साल की उम्र में गोल्ड मेडल जीतकर एम.ए. टॉप की सुषमा मोघे, राज्यपाल भी हैरान

इंदौर: उम्र केवल एक संख्या है, यह साबित कर दिखाया 78 वर्षीय सुषमा प्रदीप मोघे ने। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के दीक्षांत समारोह में सुषमा ने एम.ए. मराठी में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा। जब उन्होंने मंच पर जाकर मेडल और डिग्री प्राप्त की, तो राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी हैरान रह गए।

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सुषमा के बेटे गौरव, बहू पूजा और पोते रेयांश ने मंच से तालियों के साथ उनका हौसला बढ़ाया। राज्यपाल ने भी सुषमा का सम्मान किया और पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।

40 साल का शिक्षण जीवन

सुषमा मोघे ने छत्तीसगढ़ के चिरीमिरी में एक केंद्रीय विद्यालय में 40 साल तक टीचर के रूप में काम किया। इसके पहले उन्होंने जीवाजी विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में MSc किया था। 2000 में रिटायर होने के बाद वे इंदौर आ गईं और लाइब्रेरी व रीडिंग ग्रुप्स से जुड़ गईं।

तीन साल पहले शुरू हुआ नया सफर

लगभग तीन साल पहले सुषमा ने ऑनलाइन लिटरेचर ग्रुप पर एम.ए. मराठी के कोर्स का विज्ञापन देखा। शुरुआत में उन्होंने अपनी 44 साल की बेटी नंदिनी को कोर्स में दाखिला लेने के लिए मनाया, लेकिन जब नंदिनी ने मना कर दिया, तो सुषमा ने खुद अप्लाई करने का निर्णय लिया।

सीखने की कोई उम्र नहीं

सुषमा ने कहा, “मैंने तय किया कि मैं खुद यह पढ़ाई करूंगी और जो मैं हमेशा से पढ़ना चाहती थी, उसे पूरा करूंगी।’’ उनका यह प्रयास साबित करता है कि सीखने और खुद को आगे बढ़ाने की कोई उम्र नहीं होती।

सुषमा मोघे की यह उपलब्धि न केवल बुजुर्गों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह हर किसी को याद दिलाती है कि लगन और मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

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