Opinion

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर राहुल गांधी और कांग्रेस का भ्रम जाल -इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी द्वारा तार्किक विश्लेषण
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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर राहुल गांधी और कांग्रेस का भ्रम जाल -इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी द्वारा तार्किक विश्लेषण

कुछ दिनों से अनुभव किया जा रहा है कि राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता एक ही प्रकार के ट्वीट और बयान दिए जा रहे हैं, जो किसी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होते हैं और इस रहस्य का उदघाटन कांग्रेस की रिसर्च विभाग की टूलकिट उजागर होने से होता है जिसको कांग्रेस झूठा बतलाती है विरोधियों की चाल बताती है। उसी टूलकिट में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का विरोध करने का और नरेंद्र मोदी को बदनाम किस प्रकार करना है, विस्तार पूर्वक बतलाया गया है।सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट जो कि दिल्ली में चल रहा है और जिसके अंतर्गत 50 से ज्यादा इमारतों को बनाया जा रहा है जिसमें भारत की संसद, उपराष्ट्रपति भवन,अनेक मंत्रालय , प्रधानमंत्री निवास आदि का निर्माण किया जा रहा है।यहाँ यह बताना भी आवश्यक है कि देश की जनता यह भली भांति जानती है कि उप राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री निवास आदि का स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का नहीं होता।यदि आग...
पहले जागो फिर जगाओ
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पहले जागो फिर जगाओ

हमें यह कहने में गर्व का अनुभव होता है कि हम भारत वर्ष के निवासी हैं जो उस समय विश्व गुरु था जब दूसरे देश सभ्यता और संस्कृति से परिचित तक नहीं थे। विश्व पटल पर मानव जनित आज जितनी भी समस्याएँ हैं, हमारा देश सदियों पहले से उसके प्रति सबको आगाह करता रहा है। इसके साथ ही इस कटु यथार्थ से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि हम खुद सोकर दूसरों को जगाते रहे, दूसरे जाग गए और हमारी तन्द्रा अभी भी नहीं टूटी। हमारे पर्यावरण का पतन इसका जीता जागता उदाहरण है।विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में हमारे प्रबुद्ध और दूरदर्शी ऋषियों ने वृक्ष लगाने से प्राप्त होने वाले पुण्य को पुत्र प्राप्ति के समतुल्य मानकर महिमा मंडित किया है। प्रकृति की पूजा के बहाने संरक्षण की धारणा वैदिक युग से शुरु की गई थी जिसको विश्व के बहुतायत देशों ने किसी न किसी रूप में अपनाया किन्तु हम जुबानी जमा - खर्च ही करते रहे।वैदिक युग से निकल...
लाशों पर सियासी सियापा, ‘पुरानी बोतल में नयी शराब’ जैसा
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लाशों पर सियासी सियापा, ‘पुरानी बोतल में नयी शराब’ जैसा

अजय कुमार, लखनऊ, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकारलखनऊ कोरोना महामारी के बीच नदियों में बड़ी संख्या में उतराती लाशों ने तमाम बीजेपी सरकारों की सांसे फुला दी हैं। विपक्ष हमलावर है तो, सत्ता पक्ष सफाई देने में जुटा है। सबके अपना-अपना सच और दावे है। जनता को यह सच एवं दावों की हकीकत समझ में आए या नहीं, लेकिन उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। क्योेंकि यह वह दौर है जब नेता ही नहीं मीडिया भी किसी घटना की हकीकत दिखाने की बजाए उस घटना को कैसे मिर्चा-मसाला लगाकर बेचा जाए इस पर ज्यादा ध्यान देता है। ऐसे में हमें-आपको किसी न किसी के ‘सच’ पर तो विश्वास करना ही पडेगा। हर मुद्दे पर तो कोर्ट अपना फैसला सुना नहीं सकती है।     वैसे ’लाशे’ भी तरह-तरह की होती हैं,लेकिन सब ‘लाशों’ पर राजनैतिक हंगामा हो ऐसा भी जरूरी नहीं है। हमारे सियासतदार लाशों का धर्म वर्ग,सम्प्रदाय और शहर-प्रांत देखकर ...
मैं इंदिरा का बेटा हूं : राजीव गांधी
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मैं इंदिरा का बेटा हूं : राजीव गांधी

-डाॅ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, इन्दौर31 अक्टूबर 1984 को दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय ने लिया गया। किन्तु राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में सोनिया गांधी नहीं थीं। रशीद किदवई के अनुसार ‘‘राजीव गांधी जब एम्स पहुंचे तब सोनिया गांधी ने उन्हें रोकर आग्रह किया कि वो प्रधानमंत्री ना बनें। सोनिया ने उन्हें खतरे की तरफ आगाह किया। उसके जवाब में राजीव गांधी ने कहा कि ‘‘मैं इंदिरा गांधी का बेटा हूं, जो लोग मुझे नहीं पसंद करते हैं वो मुझे वैसे भी नहीं छोड़ेंगे।’ ये सुनकर सोनिया निरुत्तर हो गईं।’’    जवाहर लाल नेहरू के नाती और इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी की राजनीति में दिलचस्पी नहीं थी। उनकी पत्नी सोनिया गांधी भी यही चाहती थीं कि वो राजनीति से खुद को दूर रखें। इतने बड़े सियासी खानदान स...
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