RNI N. MPHIN/2013/52360; प्रधान संपादक - विनायक अशोक लुनिया

झोलाछाप डॉक्टर को पनाह देना कहीं आपको ना पड़ जाए भारी गरीबों की जान के साथ अस्मिता से खेलते फर्जी डिग्री धारक बंगाली

झाबुआ। प्रशासन की नाक के नीचे अवैध तरीके से संचालित फर्जी डिग्री धारियों के क्लिनिक से अनेक लोगों ने अपनी जान गवाई है लेकिन फिर भी जिला प्रशासन इन झोलाछाप पर नकेल कसने में नाकामयाब ही हुआ है। एक तरफ तो इन बंगालियों के कारण जहाँ जनता की जान आफत में है वही इनके आसपास रहने वाली बहन बेटियां भी सुरक्षित नही है। ये झोलाछाप पैसों के दम पर फर्जी तरीके से जिलें की नागरिकता ले लेते है फिर राशन कार्ड सहित तमाम शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर गरीबों के हक पर डाका डालते है वही आसपास रहने वाली बहन बेटियों को बुरी नजर से देखते है उन्हें बहला – फुसला कर अनैतिक कार्य तक कर डालते है। 
ज़िलें की थांदला तहसील के एक गाँव मे ईसी तरह एक बंगाली ने नाबालिग प्रिया (बदला हुआ नाम) पर प्रेम जाल के डोरे डालें व उसे लेकर फरार हो गया। कुछ सूत्रों से ज्ञात हुआ कि उक्त तथाकथित बंगाली उज्जैन ज़िलें के किसी गाँव में पनाह लिए हुए है लेकिन परिजन पुलिस उस तक पहुँचती वह वहाँ से भी फरार हो गया है। माता-पिता ने पुलिस चौकी में रिपोर्ट दर्ज करवाई है लेकिन अभी तक उन दोनों का कोई सुराख हाथ नही लगा है। अब ऐसे में जब इन फर्जी डिग्री धारियों के कागजात भी नकली हो तब पुलिस प्रसाशन उसे पकड़ पाने में भी अक्षम ही दिखाई दे रहा है। ऐसे में जनता को जागरूक होना पड़ेगा व ऐसे तथाकथित फर्जी डिग्री धारकों व अवैध डॉक्टरों से बचना होगा वही लामबंद मोर्चा खोलते हुए उन्हें अपने आसपास से खदेड़ना होगा। स्थानीय नेता की बात करें या शासन प्रशासन की दोनों ही धन देवता के आगे नत मस्तक हो जाते है ऐसे में जनता की लड़ाई की आखरी उम्मीद मीडिया ही है जिससे ऐसे मामले उजागर होते आये है, वही मीडिया व अन्य सामाजिक संगठन भी जिला कलेक्टर व एसपी से ऐसे मामले में गम्भीरता से दखल देने की अपील कर रहे है।

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